कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की बैठक मंगलवार को नई दिल्ली में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रोफेसर विजयपाल शर्मा ने की। इसमें खरीफ फसल 2025-26 के मूल्य निर्धारण पर चर्चा हुई। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने एमएसपी पर खरीद की गारंटी की मांग की। उन्होंने राजस्थान का उदाहरण देते हुए बताया कि 2024-25 में एमएसपी पर मूंग की 8.19%, उड़द की 0.018%, मूंगफली की 12.68% और सोयाबीन की केवल 6.98% खरीद हुई। किसानों को मंडियों में एमएसपी से कम दाम पर फसल बेचनी पड़ी। इससे मूंग में 3500, उड़द में 1400, मूंगफली में 2000 और सोयाबीन में 1500 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान हुआ। चारों फसलों का कुल नुकसान 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा है। प्रधानमंत्री ने एमएसपी को ‘मोदी की गारंटी’ बताया है। केंद्र सरकार ने संसद में कई बार आश्वासन दिया है कि किसी किसान को एमएसपी से कम दाम पर फसल नहीं बेचनी पड़ेगी। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग ने तीन बार एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाने की अनुशंसा की है। सरकार की एक समिति ने 21 अप्रैल 2023 को एमएसपी को आरक्षित मूल्य घोषित करने और नीलामी एमएसपी से शुरू करने की सिफारिश की है। रामपाल जाट ने आयोग से इस संबंध में फिर से अनुशंसा करने का आग्रह किया है। खरीद में बाधा को दूर करने के लिए उचित औसत गुणवत्ता के मापदंडों को समय के अनुकूल बनाकर उनकी जांच की न्यायोचित व्यवस्था करने तथा खरीफ की फसलों की खरीद 1 सितंबर से एवं रवि की फसलों की खरीद 15 फरवरी से आरंभ करने का भी आग्रह किया है। इस बैठक में किसान महापंचायत उत्तराखंड के अध्यक्ष भोपाल सिंह, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष पारसनाथ साहू, मध्य प्रदेश के अध्यक्ष राजेश धाकड़ तथा हरियाणा प्रदेश के महामंत्री नवनीत ने भी भागीदारी कर अपने विचार रखे|। इनके अतिरिक्त अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों में भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक के साथ अशोक बालियान, सेवा सिंह आर्य, कोटी रेडी आदि आदि ने भी अपने विचार रखें, जिनकी सूची संलग्न है। आयोग की ओर से गैर सरकारी सदस्य रतनलाल डागा ने स्वागत भाषण दिया| सदस्य सचिव विवेक शुक्ला ने कार्यक्रम का संचालन किया। इनके अतिरिक्त भी उनके अन्य अधिकारी इस बैठक में उपस्थित रहे।


