पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में सोमवार को डिजिटल मेंटल हेल्थ पर वर्कशॉप हुई। इस वर्कशॉप में स्पीकर के तौर पर मानसिक शक्ति फाउंडेशन के डायरेक्टर डॉ. अमरेश श्रीवास्तव मौजूद रहे। राज्यपाल रमन डेका बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए। डॉ श्रीवास्तव ने कहा – तेजी से बदलते दौर में हर स्टूडेंट का हेल्थ एक सेंसिटिव मुद्दा है और इसे पूरी गंभीरता के साथ डील करना चाहिए। यदि कोई छात्र अच्छी तरह से पढ़ नहीं रहा है तो इसके पीछे मेंटल हेल्थ कारण हो सकता। विशेषज्ञों को अपनी रूढ़िवादी सोच बदलते हुए इस तरह से भी सोचना चाहिए। ताकि स्टूडेंट की हेल्प कर सकें। उन्होंने कहा, हम लोगों को ये समझना चाहिए कि जिस सब्जेक्ट को हमने स्टूडेंट को पढ़ाया ही नहीं, उसे उसकी जानकारी कैसे होगी। हमने स्टूडेंट्स को कभी मेंटल हेल्थ के लिए गाइड ही नहीं किया, ऐसे में वो अपनी समस्या को समझ पाएगा, ये अपेक्षा करना सही नहीं है। डिजिटलाइजेशन अच्छा पर कंटेंट पर फोकस करना होगा वहीं राज्यपाल रमन डेका ने अपने कोविड का अनुभव शेयर करते हुए कहा कि डिजिटलाइजेशन से सोसाइटी इम्प्रूव हुई है। मुझे तीन दफा कोविड हुआ, इस दौरान में डिजिटली एक्टिव रहा। कोई दूसरा विकल्प नहीं था। लेकिन इसके उपयोग की सीमा अनिश्चित होना चिंताजनक है। मल्टी कंटेंट के वर्ल्ड में हमें स्टूडेंट्स को डिफरेंट कंटेंट की जानकारी देनी चाहिए। उससे उनके मेंटल हेल्थ पर पड़ने वाले इम्पैक्ट पर भी बात करनी चाहिए। बेहतरी के लिए शिक्षकों की ओर से इस तरह की पहल होनी चाहिए। 16 जुलाई को बैठक में मेंटल हेल्थ पर कुलपतियों से हुआ डिस्कशन पिछले महीने 16 राज्यपाल ने सभी शासकीय यूनिवर्सिटी के कुलपतियों की बैठक ली थी। इस बैठक में राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों के कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रिक्त पदों पर प्राथमिकता से भर्ती करने के लिए कहा। उन्होंने सभी कुलपतियों से कहा है कि डीन स्टूडेंट वेलफेयर को सक्रिय करें और स्टूडेंट्स की शिकायतों पर त्वरित प्रतिक्रिया दें। इसी बैठक में राज्यपाल ने सोशल मीडिया के इस दौर में छात्रों के तनाव प्रबंधन पर भी विशेष बल देने को कहा था। ये इसी बैठक का आउटकम था कि सोमवार को मेंटल हेल्थ पर सेमिनार किया जा रहा है।


