RCA में फिर सियासी लड़ाई:एडहॉक कमेटी के 4 सदस्यों ने कन्वीनर के फैसले पलटे, कुमावत ने जोधपुर में नई कार्यकारिणी को दी मान्यता

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में जारी सियासी ड्रामा लगातार बढ़ता जा रहा है। एडहॉक कमेटी कन्वीनर दीनदयाल कुमावत ने जोधपुर जिला क्रिकेट संघ से धनंजय सिंह खींवसर को हटाकर नए पदाधिकारियों को मान्यता दी है। वहीं एडहॉक कमेटी के चार सदस्यों ने कुमावत के खिलाफ मोर्चा खोल उन्हें बहुमत के आधार पर फैसला लेने की बात कही है। साथ ही चार सदस्यों ने सिलेक्शन कमेटी के चेयरमैन अनिल सिन्हा के खिलाफ बनाई जांच कमेटी को रद्द कर सिन्हा को ऑब्जरवेशन कमेटी का सदस्य नियुक्त किया है। कोर्ट के फैसले के बाद हुए चुनाव
एडहॉक कमेटी कन्वीनर दीनदयाल कुमावत ने कहा- कोर्ट के फैसले के बाद नियमों के तहत जोधपुर जिला क्रिकेट संघ के चुनाव हुए। इसमें आशीष व्यास को अध्यक्ष, दिलीप सिंह को सेक्रेट्री और मनीराम विश्नोई को कोषाध्यक्ष बनाया गया। 8 दिसंबर को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन ने जोधपुर जिला संघ की नई कार्यकारिणी को एफिलिएशन दे दिया है। अब यह पदाधिकारी ही आधिकारिक तौर पर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के कामकाज में शामिल रहेंगे। पूर्व कार्यकारिणी को कोर्ट के फैसले के बाद हटा दिया गया था। इसी एफिलिएशन के आधार पर जोधपुर कोर्ट ने जोधपुर की मौजूदा कार्यकारिणी को सस्पेंड माना था। खींवसर बोले- तानाशाही बनाम लोकतंत्र की लड़ाई
वहीं जोधपुर जिला क्रिकेट संघ के पदाधिकारी धनंजय सिंह खींवसर ने कहा- RCA में तानाशाही बनाम लोकतंत्र की लड़ाई है। 4 सदस्य बनाम 1 सदस्य फैसले हो रहे हैं। ऐसे में अब चार लोग गलत और एक सही। यह लोकतंत्र में संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि RCA की एडहॉक कमेटी में लोकतांत्रिक ढांचे को कुचलने का यह प्रयास पूरी तरह गलत है। संविधान के अनुसार बहुमत से निर्णय अनिवार्य है। फिर भी कन्वीनर डीडी कुमावत तानाशाही रवैया के साथ एकतरफा निर्णय लेकर क्रिकेट के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। राजनीतिक द्वेष के चलते मुझे जानबूझकर निशाना बना परेशान किया जा रहा है। उनके द्वारा जारी लेटर इसका प्रमाण है, जबकि हम चारों ने बहुमत से क्रिकेट हित में फैसले किए हैं। एडहॉक कमेटी के चार सदस्यों ने रद्द किए कुमावत के फैसले
दरअसल एडहॉक कमेटी के चार सदस्य धनंजय सिंह खींवसर, आशीष तिवाड़ी, पिंकेश जैन और मोहित यादव ने मंगलवार को मीटिंग कर कुमावत के फैसलों को रद्द कर दिया है। चारों सदस्यों ने कन्वीनर दीनदयाल कुमावत पर बिना चर्चा और सदस्यों को विश्वास में लिए बिना एकपक्षीय आदेश जारी करने का आरोप लगाया है। एडहॉक कमेटी के चार सदस्यों ने सामूहिक बयान जारी कर बताया कि लोकतांत्रिक संचालन के लिए संयोजक से कई बार आग्रह किया गया, लेकिन इसके बावजूद वे मनमाने ढंग से निर्देश जारी कर रहे हैं। 12 जनवरी को एडहॉक कमेटी की आवश्यक बैठक बुलाई गई थी। इसमें संयोजक दीनदयाल कुमावत उपस्थित नहीं हुए। बैठक में बहुमत से ऑब्जर्वेशन कमेटी के गठन का निर्णय लिया गया। वहीं पूर्व सिलेक्टर्स के खिलाफ काफी शिकायत मिली थी। कुमावत ने ऑब्जर्वेशन कमेटी के निर्णय को निष्फल करने के उद्देश्य से अनिल सिन्हा के खिलाफ जांच के आदेश देते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति बना दी गई। इसके चलते ऑब्जर्वेशन कमेटी अपना कार्य सुचारू रूप से नहीं कर सकी। ऐसे में अब हम तीन सदस्य जांच कमेटी को खत्म करते हैं। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के भविष्य का कामकाज अब ऑब्जरवेशन कमेटी की निगरानी में ही किया जाएगा।

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