अलवर शहर के आरआर कॉलेज के जंगल में कुछ दिन पिंजरे व कैमरा ट्रैप लगे रहेंगे। असल में अभी यह तय नहीं हो सका है कि कंपनी बाग में कपड़ा गया लेपर्ड आरआर कॉलेज वाला ही है या दूसरा। आगामी कुछ दिन कॉलेज में लेपर्ड के पगमार्क देखे जाएंगे। नहीं मिलने पर माना जाएगा कि यह वही लेपर्ड था। पगमार्क मिलते हैं तो साफ हो जाएगा कि आरआर कॉलेज में लेपर्ड है। इस असमंजस के कारण आरआर कॉलेज के स्टाफ व स्टूडेंट्स में डर बना हुआ है। कॉलेज प्राचार्य ने बताया कि अभी तक यह सुनिश्चित नहीं है कि यह लेपर्ड कौनसा पकड़ा है। आरआर कॉलेज का लेपर्ड है या दूसरा। अभी वन विभाग भी स्पष्ट नहीं कर सका है। यदि आरआर कॉलेज से लेपर्ड निकला है तो रास्ते में कहीं न कहीं कैमरे में ट्रैप होता। लेकिन अभी संशय है। वन विभाग को स्पष्ट करना चाहिए। जंगल में अंदर जाने के दोनों गेट खुले हुए हैं। कॉलेज के परिसर में स्टूडेंट्स है। आगे टर्म टेस्ट भी हैं। पहले आरआर कॉलेज में मादा बताया था, फिर नर लेपर्ड वनकर्मियों ने आरआर कॉलेज में 1 दिसंबर को लेपर्ड दिखन के बाद उसे मादा बताया था। लेकिन बाद में नर लेपर्ड बताया गया। अब कंपनी बाग से नर लेपर्ड पकड़ा है। दूसरा आरआर कॉलेज से लेपर्ड निकलकर खदाना मोहल्ले में पहुंचा है। इस बीच कहीं का कोई फोटो वीडियो सामने नहीं आया है। जिससे साफ नहीं है कि आरआर कॉलेज का लेपर्ड है। तीसरा करीब 3 साल पहले खदाना मोहल्ले में इसी जगह सरिस्का बफर जोन से लेपर्ड आ गया था। जिसे बाद में ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा गया था। इन सब कारणों के कारण अभी लेपर्ड को लेकर वन प्रशासन सुनिश्चित नहीं है कि यह आरआर कॉलेज वाला लेपर्ड ही पकड़ा गया है या कोई दूसरा है।


