खंडवा शहर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी पथ संचलन नार्मल स्कूल ग्राउंड से रविवार दोपहर 3.30 बजे शुरू होगा। संघ की शताब्दी वर्ष के अवसर पर निकलने वाले संचलन में शहर की 25 बस्तियों से पांच हजार से अधिक स्वयंसेवक शामिल होंगे। संचलन के पहले नार्मल स्कूल प्रांगण में स्वयंसेवक योग प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद मुख्य वक्ता का बौद्धिक होगा। जीडीसी कॉलेज के पीछे स्कूल परिसर में संचलन द्वि-धारा स्वरुप में होगा। स्वयंसेवक आठ की पंक्ति में नार्मल स्कूल मैदान से संचलन निकलेगा। संचलन दो भागों में बंटेगा। एक भाग गर्ल्स कॉलेज से भवानी माता रोड़, जलेबी चौक, मछली बाजार, फूल गली होते हुए केवलराम चौराहा तथा दूसरा भाग पड़ावा हनुमान मंदिर से इमलीपुरा, बड़ाबम चौराहा, कुम्हार बेड़ा, सराफा, बुधवारा होते हुए केवलराम चौराहा पहुंचेगा। केवलराम चौराहे पर ये दोनों संचलन फिर से एक साथ मिलेंगे और बांबे बाजार, निगम चौराहा से पड़ावा हनुमान मंदिर होते हुए नार्मल स्कूल ग्राउंड पर पहुंचकर समाप्त होगा। शताब्दी संचलन के लिए स्वयंसेवकों ने घर-घर संपर्क करके मातृ शक्ति, समाजजन, सेवानिवृत्त सेना अधिकारी, दिव्यांग जन, वरिष्ठजन, संत समाज को कार्यक्रम में सम्मिलित होने का आग्रह किया हैं। इधर, एक दिन पहले शनिवार को संघ के पदाधिकारी के साथ ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों ने पथ संचलन रूट का निरीक्षण किया। जिसके बाद तय हुआ कि पथ संचलन के दौरान चिह्नित मार्गों से किसी भी प्रकार के वाहनों को निकलने की अनुमति नहीं रहेगी। जबकि सुरक्षा की दृष्टि से पथ संचलन से पहले भारी मालवाहक वाहनों को शहर के चारों ओर नाकों पर रोक दिया जाएगा। जिन्हें संचलन के बाद छोड़ा जाएगा। 2 स्थानों पर शुरू शाखाएं अब जिले में 300
अविभाजित खंडवा जिले में पहली संघ की शाखा बुरहानपुर में डॉ. हेडगेवार ने शुरू की थी। वहीं खंडवा नगर में संघ की शाखा 1933 यानी स्थापना के 8 वर्ष (1925) के बाद दो स्थानों पर शुरू हुई थी। पहली शाखा गोविंदेश्वर मंदिर बापट का बाड़ा हरिगंज और दूसरी माखनलाल चतुर्वेदी स्कूल पुराना बस स्टैंड पर संघ की शाखा की शुरूआत हुई थी। वर्तमान में जिले में कुल 300 से अधिक शाखाएं लग रही हैं। 1933 में खंडवा जिले में तब गिनती के स्वयंसेवक हुआ करते थे। 1 लाख से अधिक स्वयंसेवक
आज संघ में पूर्ण गणवेशधारी 1 लाख से अधिक स्वयंसेवक है। वहीं संघ का पुराना कार्यालय बापट परिवार जो खुद स्वयंसेवक थे उनके द्वारा 50 साल पहले दान की गई जगह यानी बापट के बाड़े में शुरू हुआ था। अधिवक्ता पराग गोखले ने बताया कृष्णराव सदाशिवराव गोखले ने परिवार में पुजारी बापट जी को यह जमीन निवास के लिए दान में दी थी। बापट गोखले परिवार के यहां पूजन-अर्चन करते थे। उन्होंने अपना आवास हेडगेवार स्मारक समिति को दान कर दिया था।


