संघ प्रमुख मोहन भागवत के इंदौर में 13 जनवरी को दिए एक बयान पर विपक्ष हमलावर है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे देशद्रोह वाला बयान बताया है। कहा कि बयान हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के साथ-साथ हर एक नागरिक का अपमान है। भागवत का कमेंट हमारे संविधान पर हमला है। वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि यदि मोहन भागवत इसी तरह से बयान देते रहे तो देश में उनका घूमना-फिरना मुश्किल हो जाएगा। इसी तरह, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस लीडर सचिन पायलट ने भी संघ प्रमुख के बयान का विरोध जताया है। पहले मोहन भागवत का बयान पढ़ लीजिए 3 जनवरी को इंदौर में अहिल्योत्सव समिती द्वारा आयोजित कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि प्रतिष्ठा द्वादसी, बहुशशुक्ल द्वादषी का नया नामकरण हुआ है। पहले हम कहते थे वैकुंठ एकाद्वसी और वैकुंठ द्वादसी लेकिन अब उसको प्रतिष्ठा द्वादसी कहना है। क्योंकि अनेक शतकों से परिचक्र झेलने वाले सच्चे स्वतंत्रता की प्रतिष्ठा उस दिन हो गई। स्वतंत्रता थी वह प्रतिष्ठीत नहीं हुई थी। भारत स्वतंत्र हुआ 15 अगस्त को तब राजनीतिक स्वतंत्रता हमें मिल गई थी, तब हमारा भाग्य निर्धारण करना हमारे हाथ में आ गया था। हमने एक संविधान भी बनाया। एक विशेष दृष्टी जो भारत के अपने स्व से निकलती है उसमें से वह संविधान विगदर्षीत हुआ। लेकिन उसके जो भाव है उसके अनुसार चला नहीं ओर इसलिए हो गए है “स्वपन सभी साकार कैसे मान ले हम, टल गया सर से व्यथा का भार कैसे मान लें हम” ऐसी मनस्थिती समाज की थी। क्योंकि जो आवश्यक स्वतंत्रता में स्व का अजिस्ठान होता है वह लिखित रूप में हमने संविधान से पाया। लेकिन हमने अपने मन को उसके पक्के नींव पर आरुण नहीं किया। हमारा स्व क्या है राम, कृष्ण ओर शिव। यह क्या केवल देवी देवता है ऐसा नहीं है। राम ऊतर से दक्षिण भारत को जोड़ते है, कृष्ण पुर्व से पश्चिम को जोड़ते है और शिव भारत के कण-कण में व्यापत है। भारत का हर व्यक्ति अपने लौकिक जीवन के व्यवहार की मर्यादा में राम को प्रमाण मानता है। जैसा जीवन भी प्रापत होगा उस जीवन को झेलते हुए अगर झेलना पड़े तो, सुखकर जीवन मिले तो उसमें से पार होते हुए अनाश्कत कर्म करते हुए श्रैयस को प्राप्त होना कैसे कृष्ण के जैसे, ऐसा भारत का व्यक्ति मानता है ओर आखिर जीना किस के लिए है। अमृत पीकर दुनिया मरती है लो अमर हुआ मैं विष पीकर। निलकंठ भगवान का आदर्श हम सबके सामने है। यह भारत की अपनी प्रकृती का स्व है, उसकी प्रकृती का ताना बाना है। उनकी पूजा करने वाले उनकी पूजा ना करने वाले सब पर लागू है। जानते हो, ना जानते हो यह लागू है। हमारी पूजा बदल गई तो भी हमारा स्व वहीं है, ऊपर के उचारणों का परिवर्तन उसको बदल नहीं सकता इस सत्य को जानना है। हम भारत के लोग कौन है क्या है बाकी दुनिया से कैसे विशिष्ठ है। राहुल बोले-भागवत का बयान देशद्रोह राहुल गांधी ने कहा कि मोहन भागवत कह रहे हैं कि 1947 में भारत को सच्ची आजादी नहीं मिली थी। मोहन भागवत का यह बयान हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के साथ-साथ हर एक भारतीय नागरिक का अपमान है। भागवत का कमेंट हमारे संविधान पर हमला है। भागवत हर दो-तीन दिन में अपने बयानों से देश को यह बताते रहते हैं कि वह स्वतंत्रता आंदोलन और संविधान के बारे में क्या सोचते हैं। उन्होंने हाल ही में जो कहा वह देशद्रोह है, क्योंकि उनके बयान का मतलब है कि संविधान का कोई औचित्य नहीं है। राहुल ने कहा आगे कहा कि भागवत के हिसाब से अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई का कोई महत्व ही नहीं है। मोहन भागवत अगर किसी और देश में ऐसे बयान देते तो गिरफ्तार हो जाते। उनके खिलाफ केस भी चलाया जाता। खरगे बोले-उनका देश में घूमना-फिरना मुश्किल हो जाएगा कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भागवत के असली आजादी वाले बयान की निंदा की और कहा कि यदि वह ऐसे बयान देते रहे तो फिर देश में उनका घूमना-फिरना मुश्किल हो जाएगा। आरएसएस और बीजेपी के लोगों को (1947 में मिली) देश की आजादी याद नहीं है क्योंकि उनके वैचारिक पूर्वजों की ओर से आजादी की जंग में कोई योगदान नहीं दिया है। RSS-BJP के लोगों को आजादी का दिन इसलिए याद नहीं, क्योंकि उन लोगों ने देश की आजादी में कोई योगदान नहीं दिया। वहीं नरेंद्र मोदी को लगता है कि जब 2014 में वे प्रधानमंत्री बने, तब देश को आजादी मिली। तेजस्वी यादव ने भागवत से पूछे 5 सवाल तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा है कि RSS प्रमुख मोहन भागवत का अब बस यही कहना कि ‘दलितों-पिछड़ों का आरक्षण खत्म होगा तभी देश को असल मायनों में आजादी मिलेगी। बाकी रह गया है। उनके इस कथन से कि देश को असल स्वतंत्रता 2024 में ही मिली है। RSS प्रमुख ने आजादी के करोड़ों मतवालों, दीवाने देशभक्तों, असंख्य शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों का घोर अपमान किया है। संघ के लोगों का स्वतंत्रता संग्राम में अपना कोई योगदान नहीं था इसलिए ये अब बाकियों के योगदान को खत्म करने के नए प्रपंच रच रहे हैं। इनका संगठन तो स्वयं अंग्रेजों का दलाल और मुखबिर रहा है। दलितों-पिछड़ों, मेहनतकश एवं कृषक वर्गों के ऐतिहासिक योगदान को कमतर करना ही RSS का हमेशा से उद्देश्य रहा है। मोहन भागवत जी, देश गुलामी की तरफ अग्रसर है क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपया सर्वकालिक निम्नस्तर पर है, उस पर ध्यान दिजीए। मोहन भागवत जी बताए… पायलट ने कहा- आजादी में भाजपा का योगदान नहीं राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने बुधवार को कहा- भारत के जिन लाखों लोगों ने अपनी शहादत देकर अंग्रेजों को खदेड़ा था, उस 15 अगस्त 1947 की आजादी को अगर आप आजादी दिवस नहीं मानेंगे तो कब मानेंगे? देश की आजादी में सबका योगदान था। ऐसे में अलग-अलग धर्म-जाति की बात करना सही नहीं है। उन्होंने कहा… कांग्रेस के पास स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों का इतिहास है। जिसने कुछ खोया नहीं, जिसने शहादत नहीं दी, जिसने अपने परिवार को नहीं खोया, जो जेलों में नहीं गए, वो इस देश की आजादी को समझ नहीं सकते। इसीलिए उनको आजादी के अलग-अलग दिन दिखाई देते हैं। देश को आजादी भारत के लोगों ने दिलाई थी। महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने दिलाई थी। लेकिन जब कोई व्यक्ति जेल नहीं गया या कोई बलिदान नहीं दिया तो वह समझ नहीं सकता कि स्वतंत्रता का मतलब क्या है।’ यह खबर भी पढ़ें- इंदौर में भागवत बोले-लोग पूछते थे राम मंदिर क्यों जरूरी इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि लोग पूछते थे कि राम मंदिर क्यों जरूरी? रोजगार, गरीबी, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं की बात क्यों नहीं करते। मैं कहता था कि रोजगार, खुशहाली का रास्ता भी राम मंदिर से होकर जाता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…


