SIR प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पूर्व MLA:पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने लगाई याचिका,  हजारों वोट कटने का खतरा बताया; सुनवाई होगी कल

छत्तीसगढ़ में चल रही एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बस्तरिया राज मोर्चा के संयोजक और पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 25 नवंबर को दायर की गई इस याचिका में भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग को पार्टी बनाया गया है। कुंजाम का दावा है कि मौजूदा स्वरूप में लागू एसआईआर बस्तर के हजारों आदिवासी मतदाताओं के लिए अधिकारों का संकट बन सकती है। कुंजाम ने याचिका में कहा है कि बस्तर के आंतरिक, पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी पारंपरिक जीवनशैली के कारण दस्तावेजों और पहचान संबंधी औपचारिकताओं को पूरा नहीं कर पाते। ऐसे में एसआईआर के दौरान कड़ी जांच और अनुपालन की बाध्यता उनके नाम मतदाता सूची से हटाने का बड़ा कारण बन सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यह प्रक्रिया बिना व्यावहारिक संशोधनों के आगे बढ़ी तो हजारों नहीं, बल्कि लाखों लोगों के नाम एनरोलमेंट लिस्ट से हट सकते हैं। अब पढ़े पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने क्या याचिका लगाई पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने दैनिक भास्कर से चर्चा के दौरान बताया,कि मताधिकार किसी भी नागरिक का मूल संवैधानिक अधिकार है और उसकी सुरक्षा चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। लेकिन एसआईआर के चलते यह अधिकार कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। खासकर वे लोग, जिनका जीवन शहरी और नियमित दस्तावेज़ प्रणाली से अलग है जैसे बस्तर की विशिष्ट जनजातियां उनके सामने सबसे बड़ा जोखिम है। कुंजाम के अनुसार यह सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों से जुड़ा सवाल है। मौजूदा स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में याचिका की स्क्रूटनी और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही मामले के सूचीबद्ध होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रारंभिक सुनवाई में कोर्ट से महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश आने की संभावना है, जो बस्तर क्षेत्र में चल रही एसआईआर प्रक्रिया की दिशा तय कर सकते हैं। एसआईआर के नियमों में राहत, लचीलेपन और व्यावहारिकता शामिल नहीं पूर्व विधायक कुंजाम का कहना है कि यदि समय रहते एसआईआर के नियमों में राहत, लचीलेपन और व्यावहारिकता शामिल नहीं की गई, तो बस्तर के आदिवासियों का लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। इससे क्षेत्रीय चुनावी संतुलन पर भी गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐसे निर्देश देगा जो लोगों के मताधिकार और लोकतांत्रिक सहभागिता की रक्षा सुनिश्चित करें। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने बताया, कि उनकी याचिका पर सुनवाई 1 नवंबर काे चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जॉय माल्या बागची करेंगे। याचिका में सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हो रहे विवाद एसआईआर प्रक्रिया के दौरान रायपुर जिले में दो विवाद हो चुके है। पहला विवाद भाजपा विधायक का बीएलओ से हुआ था। यह विवाद 15 नवंबर को हुआ था। इस विवाद के बाद बीएलओ के पक्ष में कांग्रेसी उतरे थे, तो पार्षद और बीजेपी नेताओं ने निर्वाचन आयोग से शिकायत की थी। दूसरा विवाद रायपुर के कालीमाता वार्ड में हुआ है। यह विवाद 29 नवंबर को हुआ है। यहां पर महिला और बीएलओ के बीच विवाद हुआ तो उसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। इस मामले की शिकायत अभी तक नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया में वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। अब पढ़े क्या है एसआईआर

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