SMS की ‘बर्न’ व्यवस्था:झुलसी बच्ची को बाहरी बता फ्री इलाज से इनकार, फिर 3:30 घंटे बाद एडमिट किया

पीड़ि​त अनुष्का की मां पुष्पा रोते हुए बोलीं- एसएमएस में स्टाफ ने फ्री इलाज से मना किया और कहा- ‌50 हजार रुपए लगेंगे, घर ले आए, सोचा- गांव ले जाएंगे मगर हालत बिगड़ी तो अब ब्याज पर 50 हजार रुपए लाई हूं… करणी विहार में 132 केवी की हाईटेंशन लाइन से 70% तक झुलस चुकी अनुष्का की जलन बेपरवाह सिस्टम ने बढ़ा दी। साथ ही एसएमएस की बर्न व्यवस्था ने जले पर नमक छिड़क दिया। बच्ची की मां पुष्पा अहीरवाल ने बताया कि एसएमएस में मरहम पट्टी के प्राथमिक उपचार के बाद अनुष्का काे मध्यप्रदेश की होने के कारण मुफ्त इलाज से मना कर दिया। मां पुष्पा की मानें तो स्टाफ ने कहा कि आयुष्मान कार्ड नहीं है, इसलिए इलाज के लिए 50 हजार रुपए जमा कराने पड़ेंगे। मैं बर्न वार्ड के बाहर अनुष्का काे लेकर बैठी रही। पति फूलचंद मजदूरी करने गए थे। मैंने उन्हें बताया तो एमपी में अशोक नगर घर पर ले जाने की सोचा। 1200 रुपए में एंबुलेंस करके करणी विहार घर पहुंचे। वहां अचानक अनुष्का को बेचैनी होने लगी तो पास के प्राइवेट अस्पताल में ले गए। यहां डॉक्टरों ने गंभीर बताते हुए एसएमएस ले जाने को कहा। 1200 रुपए में फिर से एंबुलेंस करके एसएमएस पहुंचे। अब किसी जानकार से 50 हजार रुपए उधार लिए हैं। अभी तो डॉक्टरों ने बच्ची काे भर्ती कर लिया है। एमपी में अशोक नगर अपने गांव से 24 घंटे में आयुष्मान कार्ड बनवाने को कहा है। पुष्पा रो​ते हुए बोली कि बच्ची की तड़प देखी नहीं जा रही। गरीब आदमी क्या ही करे? 70 साल पुरानी ‘एच’ पोल लाइन, अंडरग्राउंड को चाहिए ~80 करोड़ पृथ्वीराज नगर विकास समति के अध्यक्ष अनिल माथुर ने बताया पीएनआर के 36 किमी क्षेत्र में 132 केवी की 8 लाइनें और 45 किमी क्षेत्र में 220 केवी की 7 लाइनें गुजर रही हैं। इन लाइनों के आसपास 1400 से अधिक कॉलोनियों बस चुकी हैं। शहर के हीरापुरा से वीकेआई तक 70 साल पुरानी ‘एच’ पोल विद्युत प्रसारण लाइन के कम ऊंचाई पर होने से वर्टिकल ग्राउंड क्लीयरेंस व हॉरिजेंटल क्लीयरेंस के नियमों की पालना नहीं हो रही है। लाइन से दो से 5 फीट की दूरी पर ही 500 अवैध निर्माण हो गए हैं। यहां हर साल 5 से 6 हादसे होते हैं, लेकिन जेडीए व निगम अवैध इमारतों पर कोई कार्रवाई नहीं करता। लोगों ने लाइन को अंडरग्राउंड करने की मांग की तो विद्युत प्रसारण निगम ने डिपोजिट में काम करवाने के लिए 80 करोड़ का प्रस्ताव बना कर नगर निगम को भिजवा दिया। अब करीब एक साल से फाइल दोनों निगमों के बीच घूम रही है। आरवीपीएनएल के चीफ इंजीनियर केके मीणा का कहना है कि काम डिपॉजिट में होना है, ऐसे में नगर निगम की ओर से बजट देने की सहमति मिलने के बाद टेंडर कर लाइन को अंडरग्राउंड करने का काम होगा। एक्सईएन उमंग विजय ने बताया कि लोगों ने 4-5 फीट पर ही बिल्डिंग बना ली है, ऐसे में हादसे हो रहे है। हमने करणी विहार पुलिस थाने में रिपोर्ट दी है। सिस्टम ने छिड़का बच्ची के जले जख्मों पर नमक; विभागों की लापरवाही का इलाज करो सरकार 1. बेफिक्र बिजली विभाग; 70 साल पुरानी ‘एच’ पोल लाइन, अंडरग्राउंड के लिए एक साल से निगम को लिखा, ~80 करोड़ मिलने का इंतजार 2. आंखें मूंदें जेडीए; हाईटेंशन लाइन के नजदीक मकानों पर लाल निशान लगा औपचारिकता की। नियम विरुद्ध ऊंचा मकान कैसे बना, देखा तक नहीं 3. बेहोशी में स्वास्थ्य महकमा; बच्ची को तुरंत इलाज देने के बजाय प्राथमिक उपचार कर टरका दिया, 3:30 घंटे बाद भर्ती किया, तड़पती रही बच्ची

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