डीडवाना में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ‘प्रमोशंस ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ के विरोध में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने कड़ा ऐतराज़ जताया है। उन्होंने इन नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। महासभा ने इन नियमों को असंवैधानिक और समाज में विभाजनकारी बताया है। महासभा के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि UGC द्वारा 15 जनवरी 2026 से प्रभावी किए जा रहे ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों और शैक्षणिक समुदाय में भारी आक्रोश का कारण बन रहे हैं। संगठन का आरोप है कि ये नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि समानता के नाम पर लाए गए इन प्रावधानों से शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच जातीय आधार पर विभाजन और वैमनस्य बढ़ने की आशंका है। इसके अतिरिक्त, नियमों की वर्तमान संरचना सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के साथ भेदभाव करती है, जिससे उनमें असुरक्षा और अन्याय की भावना उत्पन्न हो रही है। महासभा ने यह चिंता भी व्यक्त की है कि इन नियमों में झूठी शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान नहीं हैं। इससे व्यक्तिगत या जातीय द्वेष के चलते नियमों के दुरुपयोग की संभावना बनी रहती है। अंत में, संगठन ने आग्रह किया कि राष्ट्रहित, छात्रों के व्यापक कल्याण और सामाजिक समरसता को ध्यान में रखते हुए इस विवादित नियमावली को तत्काल वापस लेने के निर्देश संबंधित विभाग को दिए जाएं।


