अंतराष्ट्रीय महिला दिवस…बिहान से जुड़कर महिलाएं बनी आत्मनिर्भर:सब्जी की खेती, मुर्गी पालन से लाखों की आय, लोन लेकर शुरू किया खुद का व्यवसाय

कोंडागांव जिले की महिलाएं अब घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर कई क्षेत्रों में व्यवसाय कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं अलग-अलग क्षेत्रों में आय अर्जन कर रही है। माकड़ी विकासखंड की महिलाओं ने खुद को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए व्यवसाय शुरू किया है। ओंडरी गांव की चंद्रिका मरकाम कृषि से सालाना 2.18 लाख रुपए कमा रही है। हीरापुर की रहने वाली संतोषी देवांगन ने बैंक से लोन लेकर कपड़े की दुकान चालू किया। धनोरा गांव की अनिता मंडावी ने साल 2022 में मुर्गी पालन का काम शुरू किया। हर माह उनकी मासिक आय 20 हजार रुपए है। ग्राम पंचायत बफना की दयावती देवांगन सब्जियों की खेती कर लखपति दीदी बन गई है। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर पढ़िए उनकी कहानी…. डेयरी और कृषि से लाखों रुपए की कमाई ग्राम पंचायत ओंडरी की चंद्रिका मरकाम ने 2014 में मां शक्ति स्व सहायता समूह से जुड़कर अपनी सफलता की कहानी शुरू की। पहले उनका परिवार सिर्फ कृषि पर निर्भर था। आय बेहद कम थी। बिहान से मिली वित्तीय मदद से उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया। आज चंद्रिका को डेयरी और कृषि से सालाना 2.18 लाख रुपए की आय हो रही है। महतारी वंदन योजना की राशि मिलाकर उनकी मासिक आय 18,166 रुपए है। छोटे व्यवसायों से जुड़कर बढ़ी आमदनी जिले में कई महिलाएं कृषि, पशुपालन, सिलाई, बुनाई और छोटे व्यवसायों से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर ये महिलाएं न सिर्फ खुद को बल्कि अपने परिवार को भी आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। संतोषी ने कपड़ा व्यवसाय से परिवार को दी आर्थिक मजबूती विकासखंड माकड़ी के ग्राम पंचायत हीरापुर की रहने वाली संतोषी देवांगन शादी के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं। उनके पति की एक छोटी सी दुकान थी, जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा था। पूंजी की कमी के कारण वे कोई नया काम नहीं कर पा रही थीं। साल 2017 में उन्होंने 10 महिलाओं के साथ मिलकर जय मां धरती स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। समूह की बचत सामुदायिक निवेश कोष एवं बैंक लिंकेज से प्राप्त 8.51 लाख रुपए की सहायता से उन्होंने कपड़े की दुकान शुरू की। धीरे-धीरे उनकी दुकान में ग्राहकों की संख्या बढ़ी और अब वे हर महीने 18,000 रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं। साथ ही संतोषी को राज्य सरकार के द्वारा महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है। इस तरह आज संतोषी न सिर्फ अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि अपने दो बच्चों को अच्छी शिक्षा भी दिला रही हैं। उनके पति को भी व्यापार में सहयोग मिल रहा है, जिससे उनका परिवार समृद्ध और आत्मनिर्भर बन चुका है। मुर्गी पालन से अनिता को मिली एक नई पहचान केशकाल विकासखंड के धनोरा गांव की अनिता मंडावी पहले केवल मजदूरी और कृषि पर निर्भर थीं। साल 2018 में उन्होंने जय अंबे स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया और साल 2022 में मुर्गी एवं बटेर पालन का कार्य शुरू किया। उन्होंने बैंक एवं सामुदायिक निवेश कोष से 1.50 लाख रुपए की सहायता प्राप्त की और 1 लाख रुपए की लागत से व्यवसाय की शुरुआत की। आज उनकी मासिक आय 20,000 रुपए तक पहुंच गई है, अनिता को महतारी वंदन योजना के तहत एक हजार रुपए हर महीने मिल रहा है इसके साथ ही कृषि, मजदूरी भी करती हैं। इस तरह अनिता बिहान से जुड़ कर अब तक 3 लाख रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित कर चुकी हैं और उनका परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो गया है। अब वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्नत खेती से लखपति बनीं दयावती देवांगन ग्राम पंचायत बफना की दयावती देवांगन ने कड़ी मेहनत और नई कृषि तकनीकों को अपनाकर आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ाया है। उन्होंने आईएफसी क्लस्टर के तहत सब्जी उत्पादन शुरू किया और अब तक 1 लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित कर लखपति दीदी बन गई हैं। दयावती ने अपने एक एकड़ खेत में मिर्ची, बरबटी, प्याज और लौकी की खेती शुरू की। पहले परंपरागत खेती करने के कारण उत्पादन कम था, लेकिन ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाने से न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई, बल्कि पानी की भी बचत हुई। उन्होंने जैविक खाद का उपयोग कर स्वास्थ्यवर्धक और ताजी सब्जियां उगा रही है। दयावती जय मां शारदा स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। पहले उनके परिवार की आय केवल खेती पर निर्भर थी, जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा था। समूह से जुड़ने के बाद वे कृषि सखी बनीं और आधुनिक खेती शुरू की, जिससे अच्छी आमदनी होने लगी। दयावती के परिवार को राज्य सरकार के महतारी वंदन योजना के तहत 3,000 रुपए प्रतिमाह की सहायता राशि मिल रही है। साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सालाना 6,000 की आर्थिक मदद मिल रहा है। आज दयावती का परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है और घर के बच्चों को बेहतर शिक्षा भी दे पा रही है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *