लगभग वही सुबह का वक्त, वही जयपुर-अजमेर रोड और वही भांकरोटा इलाका,… मगर भगवान का शुक्र है बच गए। एक साल पहले डीपीएस कट पर एलपीजी टैंकर हादसे ने कई जिंदगियां छीन ली थीं, जबकि सोमवार तड़के नरसिंहपुरा पुलिया पर पुलिस की तत्परता और सूझबूझ से बड़ा अग्निकांड होने से बच गया। सोमवार सुबह करीब 4:45 बजे नरसिंहपुरा पुलिया पर 30 हजार लीटर मिथाइल अल्कोहल से भरे टैंकर के कंडक्टर साइड के टायरों में घर्षण से आग लग गई। कुछ ही पलों में लपटें उठने लगीं। सूचना मिलते ही भांकरोटा थानाधिकारी श्रीनिवास जांगिड़ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और फायर फाइटर बनकर मोर्चा संभाल लिया। पुलिस ने बिना समय गंवाए हाईवे पर दोनों ओर के वाहनों को काफी दूर ही रोक दिया, जिससे लोग और वाहन खतरे के दायरे में नहीं आए। टैंकर गुजरात के कांडला से 30 हजार लीटर मिथाइल अल्कोहल भरकर भिवाड़ी जा रहा था। अजमेर से जयपुर की ओर आते समय नरसिंहपुरा पुलिया पर चढ़ते समय ये घटन हो गई। अगर आग टैंकर तक पहुंच जाती तो घटनास्थल के चारों तरफ करीब 300 वर्ग मीटर क्षेत्र में सब कुछ जल सकता था और हाईवे पर चल रहे कई दर्जन वाहन चपेट में आ सकते थे। एक साल पहले डीपीएस कट टैंकर हादसे की याद ताजा
नरसिंहपुरा पुलिया की इस घटना ने भांकरोटा के डीपीएस कट पर हुए एलपीजी टैंकर हादसे की यादें ताजा कर दीं। तब एलपीजी फैलने से हाईवे के दोनों ओर 300-300 मीटर तक दो दर्जन से ज्यादा वाहन चपेट में आ गए थे और 15 लोगों की मौत हुई थी। सोमवार को भी लगभग उसी समय हाईवे पर दूर से ही आग की लपटें और धुआं दिखाई देने लगा था। डर के कारण कई चालकों ने अपने वाहन खड़े कर दूर चले गए। पुलिस बनी फायर फाइटर; केमिकल टैंकर को फटने से बचाया मिथाइल अल्कोहल: विस्फोटक नहीं, लेकिन आग लगे तो बम से कम नहीं
मिथाइल अल्कोहल रंगहीन, तेज गंध वाला रसायन है जो बहुत जल्दी आग पकड़ता है। इसका फ्लैश पॉइंट सिर्फ 11 डिग्री सेल्सियस है। हल्की गर्मी या चिंगारी से भी इसमें आग लग सकती है। इसकी भाप हवा से मिलकर विस्फोटक गैस बादल बना सकती है। 30 हजार लीटर सड़क पर फैल जाए तो चलती आग की नदी बन सकती है। टैंकर फटने पर आग का गोला सैकड़ों मीटर तक असर पैदा कर सकता है।


