अतिक्रमण और गंदगी ही बनी पहचान, टुंगरी वीआईपी मार्ग पर तालाब में डाली जा रही मिट्टी

राजा राय| चाईबासा चाईबासा शहर व आसपास के क्षेत्रों में तालाबों का अस्तित्व संकट में है। वर्तमान समय में हकीकत तो यही बयां कर रही है। पहले तालाबों का सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व होता था। कुछ परंपराएं आज भी जीवंत है। आमजनों के जीवन से जुड़े तालाबों को लगातार पाटा जा रहा है। इनके अस्तित्व को खत्म करने की एक सोची समझी रणनीति के तहत लोग धीरे-धीरे कब्जा कर रहे हैं। शहर के कई तालाब तो खत्म भी हो गए हैं, जो बचे हैं उन पर हो रहे कब्जे पर किसी का ध्यान नहीं है। चाईबासा में कचहरी तालाब, थॉमसन तालाब, जोड़ा तालाब, शिवा तालाब, धोबी तालाब, मधु बाजार तालाब, खप्परसाई, महुलसाई मार्ग आदि स्थानों पर तालाब थे। जिनमें से मधु बाजार स्थित तालाब पुरी तरह से भरा जा चुका है। कई तालाब शैवाल, कुड़ा-करकट, गंदगी व अतिक्रमण आदि की जद में आकर अपना अस्तित्व खोने की कगार पर हैं। इस बाबत चाईबासा कोर्ट के अधिवक्ता सतीश चंद्र महतो व खीरेन्द्र महतो से दैनिक भास्कर ने सवाल किया कि तालाबों के स्वरूप के साथ किसी प्रकार से छेड़छाड़ किया जा सकता है। इस मुद्दे पर अधिवक्ताओं का स्पष्ट कहना है कि निजी अथवा सरकारी तालाब के स्वरूप में छेड़-छाड़ नियम संगत नहीं हैं। तालाब वर्षा जल संचयन, आम लोगों के उपयोग, मछली पालन, सामाजिक कार्यों आदि के लिए होते हैं। कोई नियम विरूद्ध ऐसा करता है तो उस पर प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। टुंगरी वीआईपी इलाका यानी आयुक्त, जिला जज, डीसी, एसपी व अन्य महत्वपूर्ण लोगों का आवास इसी मार्ग पर अवस्थित है। आयुक्त आवास व रेडियो स्टेशन के सामने पूर्व में एक तालाब हुआ करता था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह एक निजी तालाब है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब को धीरे-धीरे भरने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्य सड़क के किनारे तालाब के उत्तरी भाग में कई हाईवा व ट्रैक्टर के माध्यम से मिट्टी गिराई गई है। ताकि धीरे-धीरे कर इसके स्वरूप को परिवर्तित किया जा सके। जानकार लोगों का कहना है कि इस समय इस तालाब को सपाट भूमि में बदल दिया जाए तो इसकी कीमत करोड़ों की हो जाएगी। मिट्टी भराई की प्रक्रिया को महज संयोग कहा जाए या प्रयोग, यह जांच का विषय है। केस स्टडी- 1 : नप चाईबासा थॉमसन तालाब, नगर परिषद चाईबासा की वार्ड संख्या 12 में अवस्थित है। यह तालाब करीब 3.59 एकड़ अर्थात 144.6 कट्ठे में फैला हुआ है। इस तालाब का कुछ हिस्सा अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है। करीब दर्जन भर लोग घर बनाकर रह रहे हैं। इस तालाब के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने स्पष्ट और सख्त आदेश दे रखा है कि जल्द से जल्द इसे अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया जाए। तालाब में गंदगी व कचरे का अंबार है। सफाई व देखभाल के अभाव में अस्तित्व को खो रहा है। केस स्टडी- 2 : चाईबासा शहर के बीचो-बीच राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 220 के उत्तर भाग में अवस्थित यह तालाब शहर का सबसे बड़ा तालाब है। पूरा तालाब शैवाल से भर चुका है। पूर्व में लाखों रुपए खर्च कर इसकी सफाई की प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी, जो बीच में ही बंद हो गई। नालियों के माध्यम से दूषित जल, कूड़ा-करकट, गंदगी, अतिक्रमण, खटाल के गोबर का तालाब में फेंकने आदि से पुरी तरह दूषित हो चुका हैं। सेन टोला व आम लोग लोग दुर्गंध से परेशान हैं। ^तालाबों के अतिक्रमण के कारण वर्षा जल का संचय बाधित तथा बाढ़ व सूखे की घटना बढ़ सकती हैं। जलस्तर दिनों-दिन नीचा होने के साथ ही स्थानीय जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव व पर्यावरणीय असंतुलन की स्थिति बन रही है। प्रोफेसर राजेंद्र ठाकुर, भूगोल विभाग अध्यक्ष, टाटा कॉलेज चाईबासा। ^थॉमसन तालाब को लेकर झारखण्ड हाई कोर्ट का सख्त एवं स्पष्ट निर्देश है कि जल्द से जल्द अतिक्रमण कार्यों से इसे मुक्त कराया जाए। नगर परिषद की ओर से अतिक्रमण कारियों को नोटिस जारी किया किया गया है। ईद के बाद तालाब क्षेत्र को कब्जा मुक्त करा लिया जाएगा। संतोषिनी मुर्मू, प्रशासक, नगर परिषद चाईबासा। ^नियमत: निजी या सरकारी तालाब के स्वरुप को नहीं बदला जा सकता हैं। यदि कहीं भी तालाब पर अतिक्रमण या उसके स्वरूप में छेड़छाड़ किया जा रहा है। तो मैं तुरंत कर्मचारियों को उक्त स्थल पर भेज रहा हूँ। वस्तु स्थिति से अवगत होकर आगे की कानूनी प्रक्रिया नियम संगत की जाएगी। उपेंद्र कुमार, सीओ, सदर चाईबासा।

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