मध्य प्रदेश का राजगढ़। राज्य के सबसे ठंडे जिलों में शुमार। जनवरी में यहां का पारा 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ठंड ने इंसान ही नहीं, पशुओं को भी अपनी चपेट में लिया है। सर्दी के साथ भूख से 3 दिन में ही यहां 16 गायों की मौत हो चुकी है। अमानवीयता यह है कि शवों को ट्रॉली में भरकर ट्रेंचिंग ग्राउंड में एक के ऊपर एक गड्ढे में फेंक दिया गया। इन्हें कुत्ते नोचते रहे। जिंदा गायों के लिए न तो ठंड से बचने की कोई व्यवस्था थी, न ही भूख मिटाने की। 50 से 60 गायें ट्रेंचिंग गांव में भीख से तड़प रही हैं। मरने के बाद भी इन्हें दुर्गति ही नसीब हो रही है। गायों के शवों को लेकर जाते एक वाहन का वीडियो सामने आने के बाद दैनिक भास्कर की टीम पड़ताल करने गोशाला के साथ ट्रेंचिंग ग्राउंड भी पहुंची। पढ़िए, रिपोर्ट… हड्डियों से चिपके मांस को नोच रहे थे कुत्ते
टीम सबसे पहले शहर से करीब 2 किलोमीटर दूर पाटन रोड स्थित नगर पालिका के ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंची। यहां जो दृश्य देखने को मिले, वो किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को विचलित करने के लिए काफी थे। एक गड्ढे में एक के ऊपर एक कई गायों के शव पड़े थे। कुछ शव तो कंकाल में तब्दील हो गए थे। आसपास घूमते कुत्ते, हड्डियों से चिपके मांस को नोच रहे थे। ट्रेंचिंग ग्राउंड में ही बड़ी संख्या में गायें भूख से बेचैन दिखीं, जो बंधी पॉलीथिन को फाड़कर कुछ खाने को खोज रही थीं। कुछ नहीं निकलने पर पॉलीथिन खाकर ही भूख मिटा रही थीं। फोन किया तो जेसीबी की मदद से शवों को दफनाने पहुंचे
ट्रेंचिंग ग्राउंड में गायों की दुर्दशा का पता चलने पर पूर्व ऊर्जा मंत्री और कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह भी पहुंचे। उन्होंने बताया- गोशाला में गायों की लगातार मौत हो रही है। शवों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। इस पर मैं पूर्व विधायक बापू सिंह तंवर और हेमराज दांगी के साथ मौके पर पहुंचा। ट्रेंचिंग ग्राउंड में फैली अव्यवस्था और गोवंश की दुर्दशा देखकर मन भर आया। मौके से ही नगर पालिका के सीएमओ पवन अवस्थी को फोन लगाया और नाराजगी जताई। मैंने कहा, “सीएमओ साहब, यहां एक गड्ढे में 20 से 25 गायों के शव पड़े हैं। एक के ऊपर एक शवों का ढेर लगा हुआ है। कुत्ते उन्हें नोच रहे हैं। ट्रेंचिंग ग्राउंड में एक गेट तक नहीं है। है तो सिर्फ चारों तरफ पॉलीथिन, जिसे गायें खा रही हैं। नगर पालिका आखिर कर क्या रही है?” सीएमओ ने मौके पर आने की बात कही। उनके आने के पहले आनन-फानन में दरोगा जेसीबी मशीन लेकर मौके पर पहुंच गया। कुछ ही देर बाद तहसीलदार अनिल शर्मा के साथ सीएमओ पवन अवस्थी भी पहुंचे। इसके बाद खुले गड्ढे में पड़े गायों के शवों को जेसीबी की मदद से दफनाया गया। पढ़िए, पूर्व मंत्री और सीएमओ-तहसीलदार के बीच सवाल-जवाब पूर्व मंत्री: इतनी बड़ी संख्या में गायों की मौत कैसे हो गई और अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
सीएमओ: ये गायें गोशाला की थीं।
पूर्व मंत्री: कौन सी गोशाला की?
कर्मचारी: संकट मोचन गोशाला। यहां रविवार को 6, सोमवार को 2 और मंगलवार को 8 गायों की मौत हुई है। यानी तीन दिन में कुल 16 गायों ने दम तोड़ा है।
पूर्व मंत्री: इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद न तो जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई हुई और न ही व्यवस्थाओं में कोई सुधार किया गया। पूरे ट्रेंचिंग ग्राउंड में सैकड़ों गायें पॉलीथिन खा रही हैं। क्या आपने गोशाला का निरीक्षण किया?
सीएमओ: नहीं, निरीक्षण नहीं किया।
पूर्व मंत्री: सीएमओ साहब, थाने और तहसील कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाइए। तहसीलदार साहब, गोशाला की जांच पहले से चल रही है और इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं, ऐसा क्यों?
तहसीलदार: मैं जांच अधिकारी नहीं हूं।
पूर्व मंत्री: तीन दिन में किसी गोशाला में 16 गायों की मौत होती है, यह मामला आपके प्रशासनिक नॉलेज में क्यों नहीं आया? यह गंभीर लापरवाही है। अगर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। आप एसडीएम को लिखित रिपोर्ट भेजिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाइए। अध्यक्ष बोले- जिनकी मौत हुई, वो गायें हमारी गोशाला की नहीं
ट्रेंचिंग ग्राउंड में पड़े गोवंश के शवों को जिस गोशाला से जोड़ा जा रहा था, उसकी हकीकत जानने भास्कर टीम संकट मोचन गोशाला पहुंची। यहां गायों के लिए खुला बाड़ा, टीन शेड वाला हॉल और भूसा रखने के लिए बना आरसीसी कमरा है। कुछ गायें खुले मैदान में भूसा खा रही थीं, जबकि कुछ टीन शेड में खड़ी थीं, जहां ठंड से बचाव के लिए अलाव जल रहे थे। यहां गायों को चारा देने के लिए बनी होदियां खाली थीं, उनमें भूसा नहीं था। भूसा भंडारण वाले कमरे में पहुंचे तो वह खाली था। यहां एक बीमार गाय पड़ी हुई थी। इससे साफ हुआ कि गोशाला में भूसे का स्टॉक खत्म है। गायों की मौत पर गोशाला अध्यक्ष चेतराम गुर्जर से बात की। उन्होंने बताया कि जिन गायों की मौत हुई है, वे संकट मोचन गोशाला की नहीं, बल्कि नगर क्षेत्र की हैं। उन्होंने कहा कि उनकी गोशाला में 147 गाय पंजीकृत हैं, जबकि वर्तमान में करीब 195 गायों की देखरेख की जा रही है। कोई भी अधिकारी आकर निरीक्षण कर सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीने से गोशाला के खाते पर होल्ड लगा हुआ है, जिसके चलते भूसा उधार में लाना पड़ रहा है। चौकीदार को भी दो महीने से वेतन नहीं मिल पाया है। समिति किसी तरह से गायों की देखरेख कर रही है, लेकिन जिनसे उधार लिया गया है, वे भी लगातार भुगतान के लिए फोन कर रहे हैं। वहीं, नगर क्षेत्र में हो रही गायों की मौतें पॉलीथिन खाने, कड़ाके की ठंड और बीमारी के कारण हो रही है। डॉक्टर ने कहा- भूख और ठंड से जा रही गायों की जान
गायों की मौत को लेकर भास्कर टीम ने राजगढ़ पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ. प्रवीण कुमार दीक्षित से सीधी बात की। भास्कर: ट्रेंचिंग ग्राउंड में गायों के शव पड़े हुए थे, इतनी गायों की मौत कैसे हुई है?
डॉ. दीक्षित: संकट मोचन गोशाला का वेरिफिकेशन करवाया है, वहां इन गायों की मौत नहीं हुई है।
भास्कर: तो ट्रेंचिंग ग्राउंड में इतनी गायों के शव कैसे मिले?
डॉ. दीक्षित: शहर में भी बहुत सी गायों की मौत होती है। अब कहां से लाए, कितने दिन से पड़ी हुई थीं… कई ऐसे सवाल हैं। गोशाला में केवल दो गायों की मौत हुई थी, वह भी एक्सीडेंटल केस थे।
भास्कर: गायों की मौत का कारण क्या है?
डॉ. दीक्षित: गाय पॉलीथिन खा रही हैं। प्लास्टिक खाने से न्यूट्रीशन की कमी हो जाती है। चारा उनके पेट में नहीं रहता है। न्यूट्रीशन की कमी और ठंड की वजह से मौतें हो रही हैं।
भास्कर: ट्रेंचिंग ग्राउंड में 20 से 25 गाय पड़ी हुई थीं?
डॉ. दीक्षित: 20-25 गाय नहीं थीं, वो तो 16 गाय बता रहे थे। वहां 16 भी नही थीं। करीब 7 से 8 गाय ही थीं।
भास्कर: आप 7 से 8 बता रहे हैं, हमारे पास जो तस्वीर है, उसमें तो गड्ढे में ढेर लगा हुआ है?
डॉ. दीक्षित: अब वो तो नगर पालिका ही बता पाएगी, मैं नहीं पता पाऊंगा।
भास्कर: नगर पालिका तो बोल रही है, जिन 16 गायों की मौत हुई है, वह गोशाला की थीं?
डॉ. दीक्षित: नगर पालिका पूरे शहर से मृत गाय उठाकर लाएगी, और मुझसे कह देगी कि गोशाला में ऐसा हुआ है तो मैं कैसे मानूंगा? गोशाला में मैंने खुद वेरिफिकेशन किया है। हमारे डॉक्टर इलाज के लिए सुबह-शाम वहां जा रहे हैं। न हमें सूचना है न उन्हें।
भास्कर: फिर नगर पालिका के कर्मचारी झूठ क्यों बोल रहे हैं?
डॉ. दीक्षित: इस बारे में कुछ नहीं कह पाऊंगा, यह तो जांच का विषय है। मैंने कलेक्टर को भी बताया कि ऐसा कुछ नहीं है।
भास्कर: मैं खुद गोशाला में पहुंचा था, वहां चारा भूसा नहीं है?
डॉ. दीक्षित: कल शाम को ट्रक चारा लेकर वहां आ गया था।
भास्कर: गोशाला के खाते होल्ड किए गए हैं, क्या यह सही है?
डॉ. दीक्षित: गोशाला की जांच चल रही है, इसलिए होल्ड पर है।
भास्कर: जिन गायों की मौत हुई है, क्या उनका पोस्टमॉर्टम हुआ?
डॉ. दीक्षित: नहीं, शवों की चीरफाड़ करने वाला कोई नहीं था। हमने अपनी तरफ से करवाने की कोशिश की, लेकिन कोई करने को तैयार नहीं था। अधिकारी बोले- गोशाला से मृत गायों को उठाकर लाए
राजगढ़ नगर पालिका में स्वच्छता प्रभारी गिरिराज कलोसिया ने कहा- हम गायों के शव संकट मोचन गोशाला से ही उठाकर लाए थे। तीन दिन में गोशाला से हम 15 से 16 गायों को उठाकर लाए हैं, जिसका हमारे पास रिकॉर्ड भी है। गोशाला से फोन आता है, तो हम गाड़ी भिजवाकर उन्हें उठवाते हैं। नगर पालिका सीएओ पवन अवस्थी ने कहा, गोवंश मृत अवस्था में गोशाला से लाए गए थे। सभी को दफना दिया गया। गोशाला का गेट खुल गया था, इसलिए गायें ट्रेंचिंग ग्राउंड में आ जाती हैं। जिले में 150 गोशालाएं, लेकिन फिर भी दयनीय स्थिति
राजगढ़ जिले में करीब 150 शासकीय और अशासकीय गोशालाएं संचालित हैं, जिन्हें सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जाता है। जिले में कुल 135 शासकीय गोशालाएं हैं, जिनमें प्रत्येक में लगभग 100 गायों को रखने की क्षमता है। वहीं, शेष अशासकीय (निजी) गौशालाओं में उनकी क्षमता के अनुसार गायों का संरक्षण किया जाता है। इतनी बड़ी संख्या में गोशालाएं होने के बावजूद जिले में गायों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। जिला मुख्यालय स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड पर भूख से तड़पती सैकड़ों गायें पॉलीथिन खाते हुए दिखाई दीं। ये दृश्य साफ तौर पर दर्शाते हैं कि सरकार भले ही गोशालाओं का निर्माण कर रही हो या उनके लिए अनुदान बढ़ा रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर गायों की हालत में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा। ये खबरें भी पढ़ें… 1. भोपाल निगम की गोशाला में मृत मिले 6 गोवंश भोपाल में नगर निगम की अरवलिया स्थित गोशाला में 6 गोवंश मृत मिलने पर हिंदूवादी संगठनों ने हंगामा कर दिया। इसे लेकर संगठन पदाधिकारियों ने ईंटखेड़ी थाने में शिकायत भी की। कहा कि गायें भूख के मारे गोबर मिक्स चारा खा रही हैं। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। पढ़ें पूरी खबर… 2. क्या नगर निगम के कत्लखाने में कटी गायें? भोपाल में एक बार फिर गायों की मौत और गोमांस मिलने का मुद्दा सुर्खियों में है। नगर निगम के आधुनिक ‘कत्लखाना’ यानी, स्लॉटर हाउस की जिस गाड़ी से 26 टन मांस जब्त हुआ, उसमें गोमांस की पुष्टि हुई है। इसे लेकर कांग्रेसियों ने नगर निगम का दफ्तर घेरा और सवाल पूछा कि भोपाल में गोमांस कैसे बिक रहा है? पढे़ं पूरी खबर…


