लुधियाना| जब काम चल रहा था तो मैंने स्वयं अनट्रेंड लेबर को बिना किसी मात्रा व माप के कंक्रीट मिक्सर में पानी डालते हुए देखा है। लेबर ये भी नहीं जानते थे कि मिक्सर ड्रम को कितने समय तक घुमाना है। मैंने एक बार साइट(ग्रैंड वॉक के सामने) पर काम करने वाले स्टाफ से इसके बारे में पूछा लेकिन सुपरवाइजर भी इसके बारे में अनभिज्ञ था। लुधियाना में 756 करोड़ से बने पुल निर्माण में गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। वेरका चौक पर पुल के जॉइंट्स डैमेज हो गए हैं और गैप भी आ गया है। किसी भी प्रयोगशाला परीक्षण के बिना यह नग्न आंखों से देखा जा सकता है कि कारीगरी बहुत खराब है और पुल पर उपयोग की जाने वाली सामग्री निम्न गुणवत्ता की है। पुल की ऊपरी सतह पर कंक्रीट का टूटना, बिखरना व उखड़ने से सरिया पर जंग लगना शुरू हो गया है, जो स्ट्रक्चरल फेलियर का कारण बन सकता है। इसका मूल कारण अपर्याप्त कंक्रीट मिक्स डिजाइन, सरिया को ठीक तरीके से नहीं बांधना, क्यूरिंग की कमी और घटिया सीमेंट और अन्य मैटेरियल का उपयोग हो सकता है, जो पुल को प्रभावित कर रहा है। दूषित पानी का उपयोग भी स्ट्रक्चर को कमजोर करने का एक कारण हो सकता है। मिश्रण में बहुत अधिक पानी के इस्तेमाल से भी कंक्रीट की ताकत कम हो जाती है और सिकुड़न के कारण दरारें पड़ जाती हैं। पुल पर क्वालिटी कंट्रोल टीम तैनात रही होगी लेकिन उन्होंने भी क्वालिटी कंट्रोल नहीं की। इसके कारण पुल की कंक्रीट उखड़ रही है। वहीं, मंगलवार को एनएचएआई की टीम ने ठेकेदार के साथ मौके का मुआयना किया और ठेकेदार को रिपेयरिंग के आदेश जारी किए।


