अब्दुल सत्तार बोले- संविधान की हालत बकरी के बच्चे जैसी:उसे बंदर रूपी प्रशासन कर रहा बचाने का ढोंग; भोपाल में हुई SDPI की बैठक

प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के राजनीतिक विंग कहे जाने वाले सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की भोपाल में राज्य प्रतिनिधि सभा (SRC) की बैठक हुई। जिसमें पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी और प्रदेश चुनाव अधिकारी रियाज फरंगीपेटे ने राज्य कार्यकारिणी के चुनाव कराए। विदय राज मालवीय को एसडीपीआई का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। बैठक में तमिलनाडु से आए एसडीपीआई के राष्ट्रीय सचिव अब्दुल सत्तार ने एक कहानी सुनाते हुए संविधान की तुलना बकरी के बच्चे से कर दी। उन्होंने कहा कि प्रशासन बंदर की तरह संविधान को बचाने का ढोंग कर रहा है। अब्दुल सत्तार ने सुनाई कहानी
आज देश में अल्पसंख्यक जनता की हालत बकरी की तरह है। संविधान की स्थिति बकरी के बच्चे जैसी है। जिसे बचाने एक बकरा महल के अंदर रोते हुए आता है। कहता है कि राजा, मेरे बच्चे को शेर ले गया है। उसने उसे एक पेड़ के नीचे रख लिया है। आप उस बच्चे को बचाइए। इस पर बंदर राजा ने कहा कि कोई बात नहीं। हम उसे बचा लेंगे। इसके बाद बच्चे को बचाने बकरा और बंदर जंगल में जाते हैं। पेड़ के नीचे शेर बच्चे को अपने पंजे में दबाए बैठा दिखता है। बकरा सोचता है कि बंदर (राजा) शेर से बच्चे को बचा लेगा। बच्चा बच जाएगा और सब ठीक हो जाएगा। इस आस में वो खुशी से खड़ा है। तभी बंदर एक पेड़ से दूसरे, दूसरे पेड़ से तीसरे पेड़ पर कूदता रहता है। बकरी ये देखकर चिंतित होती है। पूछती है कि राजा आप ऐसा करेंगे तब तक शेर बच्चे को खा लेगा। मेरा बच्चा मुझे नहीं मिलेगा। मेरे बच्चे को आप जल्दी बचाओ। बंदर बोला, तुमने बच्चे को बचाने के लिए कहा है। तुम बताओ मेरी कोशिश में कोई कमी है क्या? ये बकरी के बच्चे जैसी हालत हमारे संविधान की है। जिसे बचाने के लिए कोई भी सामने नहीं आ रहा है। कहानी में बकरी जैसी हालत अल्पसंख्यक जनता की है और संविधान की हालत बकरी के बच्चे जैसी है। जिसे बंदर रूपी प्रशासन बचाने का ढोंग करता है। संविधान और देश का मजाक बना दिया गया
अब्दुल सत्तार ने आरोप लगाया कि आज संविधान, कानून और देश का मजाक बनाकर रख दिया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों पर लगातार संकट बढ़ रहे हैं। मस्जिदें और मदरसे तोड़े जा रहे हैं। कब्रिस्तान छीने जा रहे हैं। शरीर पर हमले हो रहे हैं, लेकिन संविधान की रक्षा के लिए कोई आगे नहीं आ रहा। हालात इतने गंभीर हैं कि देश में कानून नाम की चीज़ केवल कागजों में बची है। हिंदू खतरे में हैं…यह सबसे बड़ा झूठ
सत्तार ने ‘हिंदू खतरे में हैं’ के नरेटिव पर तीखा हमला करते हुए कहा कि देश में 80 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की है। सत्ता में भी वही हैं, हर बड़े पद पर वही बैठे हैं, फिर खतरे में कौन है? उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी हिंदू को मंदिर में जाने से मुसलमान रोक रहा है? क्या देश के नेताओं की हत्या मुसलमानों ने की? क्या देश का पैसा विदेश ले जाने वाले मुसलमान हैं? क्या जासूसी करने वाले मुसलमान हैं? फिर भी कहा जाता है कि हिंदू खतरे में हैं। यह लोगों को उन्मादी बनाने का सबसे बड़ा झूठ है। कश्मीर से वक्फ तक- मुसलमानों पर एक के बाद एक फैसले
अब्दुल सत्तार ने कहा कि मुसलमानों से जुड़े एक-एक कर फैसले थोपे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर से धारा 370 हटाई गई, तीन तलाक कानून लाया गया, अब वक्फ कानून लाया गया, कहीं अजान पर आपत्ति, कहीं हिजाब पर रोक। उन्होंने कहा कि इतने बड़े मुद्दों के बावजूद मुसलमानों की सोच छोटी होती जा रही है। अगर सब साथ नहीं आए तो आने वाले समय में बचना मुश्किल होगा। नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर्नाटक से आए एसडीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश चुनाव अधिकारी रियाज फरंगीपेठे ने बताया कि राज्य कार्यसमिति में 6 पदाधिकारियों और 5 स्टेट कमेटी सदस्यों का चयन किया है। विदयराज मालवीय को सर्वसम्मति से SDPI का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है। उन्होंने बताया कि शमशद अली को प्रदेश उपाध्यक्ष, इरफान उल हक को महासचिव, सलीम अंसारी और आदिल खान को सचिव तथा जमील अब्बास को कोषाध्यक्ष बनाया है। स्टेट वर्किंग कमेटी के सदस्यों में मुमताज कुरैशी, राकेश मेडा, नजम इकबाल, हाजी समद और बादशाह खान को शामिल किया है। आने वाले दिनों में यह टीम मध्यप्रदेश में पार्टी को मजबूत करने और समाज के शोषित, वंचित व मजलूम वर्गों के लिए काम करेगी। एसडीपीआई प्रदेश में होने वाले सभी चुनावों में सक्रिय रूप से भाग लेगी। विधानसभा चुनाव में दो सीटें जीतने का लक्ष्य
एसडीपीआई ने स्पष्ट किया है कि पार्टी का मुख्य लक्ष्य आगामी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कम से कम दो विधायक चुने जाने का है। इसके साथ ही पार्टी नगरीय निकाय और पंचायत स्तर के चुनावों में भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी। पीएफआई से संबंध के आरोपों पर सफाई
पीएफआई पर लगे प्रतिबंध और उससे एसडीपीआई के संबंधों पर पूछे गए सवाल पर रियाज ने कहा कि एसडीपीआई और पीएफआई का कोई संबंध नहीं है। पार्टी का कहना है कि एसडीपीआई एक स्वतंत्र और चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दल है, जबकि पीएफआई एक अलग सामाजिक संगठन है, जिस पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। एसडीपीआई नेताओं ने कहा कि सरकार और एजेंसियां अब तक दोनों संगठनों के बीच संबंध साबित नहीं कर पाई हैं। अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाली हर पार्टी पर आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन एसडीपीआई इन आरोपों का राजनीतिक रूप से सामना करेगी। अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों पर फोकस
एसडीपीआई ने कांग्रेस और अन्य तथाकथित सेक्युलर दलों पर अल्पसंख्यकों के मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस वर्षों से अल्पसंख्यकों के वोट लेकर उन्हें धोखा देती रही है और न तो आरक्षण के मुद्दे पर ठोस पहल करती है और न ही बुलडोजर कार्रवाई जैसे मामलों पर खुलकर बोलती है। पार्टी ने कहा कि दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ एसडीपीआई आवाज उठाएगी और जरूरतमंदों को कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराएगी। प्रदेश अध्यक्ष विदयराज मालवीय का बयान
नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष विदय राज मालवीय ने कहा कि वे वर्ष 2022 से ही इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं और इस दौरान सामाजिक न्याय के मुद्दों को लगातार उठाया गया है। उन्होंने कहा कि जहां भी एससी, एसटी और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हुए, पार्टी कार्यकर्ता बिना दिखावे के पीड़ितों के बीच पहुंचे और अपनी क्षमता के अनुसार सहायता की। विदयराज मालवीय ने कहा मालवा-निमाड़ क्षेत्र में 20 से 40 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां दलित और अल्पसंख्यक आबादी निर्णायक भूमिका में है। यदि इन वर्गों को संगठित किया गया तो कांग्रेस और भाजपा दोनों को सत्ता से बाहर किया जा सकता है। एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल
एसडीपीआई नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। पार्टी का दावा है कि मध्यप्रदेश में 42 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जिनमें 19 लाख पुरुष और 23 लाख महिलाएं शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या में एससी, एसटी, अल्पसंख्यक, अति पिछड़े और घुमक्कड़ समुदायों के मतदाता हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष न होकर एक ही राजनीतिक दल के हित में काम करता नजर आ रहा है। एसडीपीआई ने कहा कि वह संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

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