आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत राज्य में सभी थोक और खुदरा दवा दुकानों का हेल्थ केयर फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर) पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। एचएफआर पोर्टल पर पंजीकरण करने से दवा दुकानों की विश्वसनीयता में इजाफा होगा। यह कदम नकली और अवैध दवाओं की बिक्री को रोकने में मददगार सिद्ध होगा। पंजीकरण के बाद लोग आसानी से जान पाएंगे कि उनके क्षेत्र में कौन-सी दवा दुकानें मान्यता प्राप्त हैं। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित चिकित्सा सेवाएं प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। गौरतलब है कि बोकारो जिला में लगभग 1200 थोक और खुदरा दवा विक्रेता हैं। इसमें लगभग 800 से अधिक खुदरा दवा दुकानें शामिल हैं। बोकारो ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सुजीत कुमार ने बताया कि एचएफआर एक राष्ट्रीय स्तर का डिजिटल डेटाबेस है, जिसमें सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी दर्ज की जाती है। इस डेटाबेस के माध्यम से भविष्य में ई-प्रिस्क्रिप्शन, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाना अधिक सरल होगा। इसके अलावा, पंजीकरण प्रक्रिया के पूरा होने के बाद दवा दुकानों की निगरानी बेहतर होगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली होगी मजबूत झारखंड में निजी स्वास्थ्य संस्थानों, विशेषकर दवा दुकानों की संख्या काफी अधिक है। इसलिए, इनका एचएफआर में पंजीकरण अत्यंत आवश्यक है, ताकि राज्य की डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूती मिल सके। उन्होंने बताया कि राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय ने सभी जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन को इस दिशा में कार्यवाही करने के लिए निर्देश दिए हैं। हर एसोसिएशन को अपने-अपने क्षेत्र की सभी दवा दुकानों का जल्द ही एचएफआर पोर्टल पर पंजीकरण कराने के लिए कहा गया है। इस प्रक्रिया के तहत यदि किसी दवा विक्रेता या एसोसिएशन को कोई समस्या आती है, तो उन्हें राज्य और जिला स्तर पर एबीडीएम की टीम से सहायता लेने का सुझाव दिया गया है। इस प्रकार की पहल से लोग जरूरत के समय पास की पंजीकृत दवा दुकानों की पहचान आसानी से कर सकेंगे, जिससे चिकित्सीय सुविधाएं और सुरक्षित दवाएं समय पर उपलब्ध हो सकेंगी।


