‘मैं जयपुर के एक होटल में रुकी थी, उसका मालिक जबरन मेरे कमरे में घुसा। कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर मेरा रेप किया।’ ‘मैं एक नामी डॉक्टर को उनके क्लिनिक बीमारी की जांच के लिए गई तो उसने मेरी आबरू लूट ली।’ ‘एक जाने माने वकील ने मेरा केस सुलझाने के बहाने अपने ऑफिस बुलाकर मेरे साथ ज्यादती की।’ ‘पुलिसकर्मी ने मेरे साथ हमदर्दी दिखाई, जयपुर से दूर एक सुनसान जगह ले जाकर दरिंदगी की। ‘ राजस्थान के हाई प्रोफाइल लोगों के खिलाफ इसी तरह रेप-गैंगरेप-छेड़छाड़ के 27 मुकदमों की फाइल जब जयपुर के पुलिस अफसरों तक पहुंची तो वे भी चौंक गए। लेकिन इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि ये सभी 27 मुकदमे झूठे थे और 2 युवतियों ने अलग-अलग लोगों के खिलाफ दर्ज करवाए थे। हर बार नए नाम और पहचान बदलकर। पिछले 10 साल में जयपुर में रहने वाली उज्जैन की युवती ने रेप के 13 और मूलत अलवर की रहने वाली इंजीनियर युवती ने रेप और छेड़छाड़ के 14 मुकदमें दर्ज कराए। अधिकांश मामलों में पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी और एक मामले में कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया। इस बार संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- कैसे पुलिस जांच ने इन दोनों शातिर युवतियों के झूठ का पर्दाफाश किया… सबसे पहले जयपुर में रह रही उज्जैन की युवती के 2 मामलों से समझते हैं केस नंबर 1: आरोप-युवती को नशे में देख गेस्ट हाउस मालिक ने किया रेप! जयपुर में रहने वाली उज्जैन की युवती ने 4 मई 2023 को बनीपार्क पुलिस थाने में केस दर्ज कराया। एफआईआर के अनुसार उसने 28 अप्रैल 2023 को बनीपार्क इलाके के एक गेस्ट हाउस में रूम बुक किया। वो रात को करीब 1 बजे होटल पहुंची। इस दौरान एक व्यक्ति रूम में आया, जो खुद को होटल मालिक बता रहा था। उसने युवती को नशे की हालत में देखकर फिजिकल होने को कहा। जब युवती ने मना किया तो उसने रेप किया। युवती ने पुलिस को बताया कि अकेली होने के कारण वह डर गई और बाद में पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर घटना की जानकारी दी। युवती ने बताया कि आरोपी के ही मोबाइल नंबर पर फोन कर उसने होटल की लोकेशन ली थी। वह सामने आने पर आरोपी को पहचान सकती है। पुलिस की जांच रिपोर्ट : रेप के समय युवती ने कैसे किए 7 बार कॉल पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने युवती के बयान दर्ज कराए। इसके बाद युवती को कई बार मेडिकल जांच के लिए नोटिस भेजा और फोन भी किए, लेकिन युवती ने मेडिकल जांच नहीं कराई। जांच के दौरान पुलिस ने जब तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की तो युवती का झूठ पकड़ा गया। युवती ने 1:45 AM पर होटल में चेक इन किया था। वह जिस समय वह रेप हाेने की बात कह रही थी। उस दौरान युवती ने रात में करीब एक घंटे के दौरान 7 बार गेस्ट हाउस के नंबर पर कॉल किए। युवती कॉल कर कभी AC के काम नहीं करने, टॉवल, साबुन नहीं होने और अन्य सुविधाएं सही नहीं होने की शिकायत करती रही। फिर रिफंड की मांग करने लगी। जब अमाउंट रिफंड नहीं किया तो देख लेने की धमकी देकर 3:30 AM पर चली गई। पुलिस का तर्क है कि अगर पीड़िता मदहोशी की हालत में थी और आरोपी जबरदस्ती कर रहा था तो उसके द्वारा कॉल किया जाना संभव ही नहीं है। अगर युवती गेस्ट हाउस के नंबर पर कॉल कर सकती थी तो उसने तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल क्यों नहीं किया। वहीं, आरोपी गेस्ट हाउस मालिक अपनी पत्नी, बेटी व दो बहनों के साथ रहता है। ऐसे में इन महिलाओं की मौजूदगी में भी रेप संभव नहीं है। वारदात के समय गेस्ट हाउस में मौजूद किसी व्यक्ति ने रेप की घटना के बारे में नहीं बताया। उन्होंने युवती के चीखने या चिल्लाने की आवाज भी नहीं सुनी। नतीजा : पुलिस ने जांच में माना कि युवती ने अवैध वसूली के लिए रेप का झूठा केस दर्ज कराया था। पुलिस ने 13 जून 2023 को एफआर लगा रिपोर्ट कोर्ट में पेश की और युवती के खिलाफ धारा 182/ 211 आईपीसी (लोक सेवक को गुमराह करने और व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के इरादे से झूठा आरोप लगाने) के तहत कार्रवाई करने के आदेश प्राप्त किए। केस नंबर 2: गुजरात के बिजनेसमैन और उसके चचेरे भाई पर गैंगरेप का मुकदमा, आरोप- आपत्तिजनक वीडियो-फोटो बनाए बनीपार्क थाने में उज्जैन की युवती द्वारा दर्ज कराया गया झूठा रेप मुकदमा कोई पहला मामला नहीं था। इसी युवती ने करीब 4 साल पहले 3 दिसंबर 2019 को सिंधी कैंप पुलिस थाने में गैंग रेप का केस दर्ज कराया था। युवती ने आरोप लगाया कि वह 5 नवंबर 2019 को सिंधी कैंप इलाके के एक क्लब में गई थी। जहां उसका दोस्त व एक अन्य परिचित पार्टी कर रहे थे। वह अकेली टेबल पर बैठी थी। इस दौरान गुजरात निवासी एक युवक आया और उसके साथ पार्टी करने लगा। वह उसे होटल के एक कमरे में ले गया और खुद नींबू पानी लाने चला गया। कुछ देर बाद उसका चचेरा भाई आया और उसने रेप किया। इसके बाद दूसरे युवक ने भी रेप किया। दोनों ने युवती के आपत्तिजनक फोटो व वीडियो भी बना लिए। रात को 3 बजे दोनों ने उसे होटल के बाहर छोड़ दिया। पुलिस की जांच रिपोर्ट : सीसीटीवी ने बताई सच्चाई, जहां रेप होना बताया वो निकला महिला का कमरा जांच के दौरान पुलिस ने नोटिस जारी कर युवती को वारदात के समय पहने हुए कपड़े पेश करने को कहा। लेकिन युवती ने इनकार कर दिया। पुलिस ने होटल के सीसीटीवी खंगाले तो राज खुल गया। सीसीटीवी फुटेज में नजर आया कि युवती खुद शराब पीने के बाद पड़ोस की टेबल पर बैठे युवकों के पास जाती है। उससे मांगकर सिगरेट पीती है। जबकि 164 के बयानों में युवती ने आरोपी युवक को उसके पास आने की बात कही थी। सीसीटीवी फुटेज में युवती होटल के किसी कमरे के अंदर जाती हुई नजर नहीं आई। जब होटल प्रबंधन से रेप की घटना वाले रूम की डिटेल मांगी गई तो सामने आया कि 5 नवंबर 2019 को उस कमरे में एमपी की एक महिला रुकी हुई थी। ऐसे में वहां रेप होना संभव नहीं है। सीसीटीवी फुटेज में युवती शराब पीने और खाना खाने के बाद होटल से सामान्य तरीके से बाहर जाती नजर आ रही है। इस दौरान वह पोर्च में गार्ड से करीब 15 मिनट तक बातचीत भी करती है। जांच का नतीजा : होटल कर्मचारियों के बयान और सीसीटीवी फुटेज की जांच से पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि युवती के साथ रेप नहीं हुआ था। युवती की बताई घटना जांच में झूठी पाई गई। पुलिस ने झूठा मानते हुए केस में एफआर लगा दी। हर बार नया नाम, नई वारदात और फिर नए शिकार की तलाश पुलिस जांच में सामने आया कि उज्जैन की रहने वाली ये शातिर युवती एक दो नहीं बल्कि कई हाईप्रोफाइल लोगों के खिलाफ इसी तरह मुकदमा दर्ज करवा चुकी है। युवती जयपुर में किराए पर रहती है। हर बार नई जगह और नए नाम से लोगों से मिलती है। पुलिस रिकॉर्ड में इसके 12 अलग-अलग नामों की पुष्टि हो चुकी है। महिला के खिलाफ भी जयपुर के शहर के कई थानों में 13 मामले दर्ज हैं। इनमें 11 में पुलिस चार्जशीट पेश कर चुकी है। कुछ मामलों में महिला गिरफ्तार भी हो चुकी है। अब जयपुर की B.tech पास युवती के दर्ज कराए 2 मामलों की पूरी इन्वेस्टिगेशन से समझते हैं कि वो कैसे हाईप्रोफाइल लोगों को अपना शिकार बनाती है… केस नंबर- 1: आरोप : होटल में नशीला पदार्थ पिलाकर किया रेप युवती ने आरोप लगाया कि उसके साथ रेप के एक पूर्व आरोपी के दोस्त से उसकी जान पहचान हो गई थी। वह 29-30 अप्रैल 2023 की रात को निर्माण नगर की एक होटल में लेकर गया। जहां आरोपी ने शराब पी और कॉफी पिलाई। इसके बाद युवती बेहोश हो गई। इस दौरान युवक ने रेप किया। घटना के बाद आरोपी अपने दोस्तों के साथ मिलकर उसे धमकाने लगा। श्याम नगर थाना पुलिस ने जब केस दर्ज नहीं किया तो इस्तगासे के जरिए केस दर्ज कराया। पुलिस की जांच रिपोर्ट : इन्वेस्टिगेशन के दौरान सामने आया कि युवती ने ही आरोपी को आगे बढ़कर कॉल किए थे। वह नजदीकियां बढ़ाना चाहती थी। सीडीआर में सामने आया कि युवती ने ही आरोपी युवक को कॉल कर बुलाया था। दोनों के बीच 250 से अधिक कॉल हुई। होटल का नंबर युवती की सीडीआर में 14 अप्रैल 2023 से दर्ज मिला। जबकि युवक की सीडीआर में होटल का नंबर ही नहीं था। होटल में एंट्री करने के बाद दोनों अपनी इच्छा से रूम में गए थे। होटल स्टाफ को उस दिन किसी तरह की शिकायत नहीं मिली। कथित रेप की घटना के बाद भी दोनों के रिश्ते सामान्य रहे और दोनों में अक्सर बातचीत होती थी। होटल से निकलने के बाद युवती ने अपने वकील से बातचीत की थी। युवती ने 29 अप्रैल 2023 को रेप का आरोप लगाया। 4 मई को श्याम नगर में परिवाद पेश किया। जबकि वह कहीं भी केस दर्ज करा सकती थी। इतना ही नहीं युवती ने रेप के दौरान पहने कपड़ों को सबूत के तौर पर पेश किया। पुलिस ने इसे दबाव बनाने की रणनीति माना है। इसलिए पुलिस ने पूर्व में दर्ज कराए गए झूठे केस को भी पत्रावली में शामिल किया। नतीजा : पुलिस ने माना कि दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे। पुलिस ने सीडीआर विश्लेषण, होटल रिकॉर्ड और गवाहों से इसकी पुष्टि की। पुलिस का तर्क है कि दोनों के बीच बाद में विवाद होने पर युवती ने रेप का केस दर्ज कराया। पुलिस इंस्पेक्टर के अलावा एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच ने भी इसकी जांच की। उन्होंने भी पूर्व जांच अधिकारियों की एफआर को सही मानते हुए 21 मई 2024 को एफआर लगा दी। केस नंबर 2: खुद के वकील के खिलाफ भी रेप का मुकदमा जयपुर की इंजीनियर युवती ने 2023 में महेश नगर पुलिस थाने में खुद के वकील पर ही रेप का केस दर्ज करा दिया। ये एडवोकेट उसके अलग-अलग मामलों में पैरवी कर रहे थे। वकील ने भास्कर से बातचीत में बताया कि महिला ने दो मामलों में उसकी फीस नहीं दी। जब उन्होंने फीस का दबाव बनाना शुरू किया तो महिला ने उन पर भी रेप का झूठा केस दर्ज कराया। इस केस में दी बार एसोसिएशन की ओर से पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन दिया और महिला पर कार्रवाई करने की मांग की गई थी। पुलिस की जांच रिपोर्ट : युवती ने केस रिओपन कराया, हर जांच में झूठ उजागर इस केस की जांच में आरोप झूठे पाए जाने पर पुलिस ने 31 जनवरी 2024 को एफआर लगा दी। युवती ने कोर्ट के आदेश पर इसे रिओपन कराया। इंस्पेक्टर से लेकर एडिशनल एसपी तक तीन अधिकारियों ने इसकी जांच की। आखिरकार जांच में केस झूठा ही पाया गया। नतीजा : जांच में युवती के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। पुलिस ने केस झूठा मानते हुए 4 सितंबर 2024 को क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी। पुलिस उपायुक्त ने युवती के विरुद्ध धारा-182 के तहत (लोकसेवक को गलत जानकारी देकर गुमराह करना) कार्रवाई करने की अनुमति दी है। एक और वकील पर मुकदमा, इस बार गिरफ्तार कर हुई पूछताछ इंजीनियर युवती ने वकालत की प्रैक्टिस के बहाने जयपुर के एक अन्य एडवोकेट से संपर्क किया। कुछ दिन बाद ही जरूरत बताते हुए पहली बार 7 हजार रुपए ले लिए। जब एडवोकेट को युवती के 2016 से कई लोगों पर रेप के मामले दर्ज कराने के बारे में पता चला तो उन्होंने उससे दूरी बना ली। इस पर युवती ने ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और हर सप्ताह 5 हजार रुपए लेने लगी। एडवोकेट के रुपए नहीं देने पर उस पर ज्योतिनगर थाने में रेप का केस दर्ज करा दिया। वहीं एडवोकेट ने युवती पर सदर पुलिस थाने में 8 मई 2024 को ब्लैकमेल कर रुपए ऐंठने को लेकर केस दर्ज कराया। इस मामले में पुलिस ने युवती को गिरफ्तार पूछताछ की। जिसमें कई अन्य लोगों को भी ब्लैकमेल करने की बात सामने आई। सोशल मीडिया व मदद के बहाने रईसों को फंसाना डीसीपी वेस्ट अमित कुमार ने बताया कि झूठे रेप के मामलों की संख्या बढ़ने पर पुलिस रिकॉर्ड की जांच की गई तो सामने आया कि 19 महिलाओं ने दो या उससे अधिक रेप के मामले दर्ज करा रखे हैं। ये महिलाएं सोशल मीडिया और मदद के बहाने रईसों से नजदीकी बढ़ाती हैं। इसके बाद रेप का झूठा केस दर्ज कराकर उन्हें ब्लैकमेल करती हैं। कुछ महिलाएं वाहन चालक से लिफ्ट लेने के बहाने बैठती हैं। फिर ब्लैकमेल कर रुपए ऐंठती हैं। पीड़ित व्यक्ति के रुपए नहीं देने पर उनके खिलाफ झूठा केस दर्ज करा देती हैं। ऐसे ही एक पीड़ित ने पिछले साल 22 अगस्त को युवती पर लिफ्ट लेकर छेड़छाड़ करने का झूठा आरोप लगाकर रुपए ऐंठने का वैशाली नगर पुलिस थाने में केस दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने युवती को धर दबोचा।


