प्रदेश में ऐसा पहली बार होगा, जब अवैध प्लाटिंग को वैध बनाया जाएगा। नगर निगम पहले अवैध प्लाट को अधिग्रहित करेगा। फिर इस पर सुविधाएं विकसित करेगा। यही नहीं सुविधाएं विकसित करने के लिए जो भी राशि खर्च होगी, उसकी वसूली भू-मालिक से की जाएगी। रायपुर नगर निगम ने जोन क्रमांक-10 के डूंडा में 1. 845 हेक्टेयर और बोरियाखुर्द में 1.16 हेक्टेयर कुल 3.005 हेक्टेयर (7.42 एकड़) जमीन को अधिग्रहित करने की प्लानिंग की है। इसके लिए दावा-आपत्ति मंगाया गया है। दावा-आपत्ति के बाद यहां वैध रूप से बसाहट के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएगी। इन विकास कार्यों में होने वाले खर्च की अंतर राशि भी वहां जमीन खरीद चुके लोग देंगे या खरीदने वाले ही देंगे। अधिग्रहण से वैध होगी प्लाटिंग, इससे निगम को मिलेगा नियमित राजस्व अगस्त 2025 में निगम की नगर निवेश टीम ने डूंडा में भूस्वामी शंकर साहू, शैलेन्द्र साहू व शिवा साहू द्वारा 1.845 हेक्टेयर जमीन पर किए जा रहे अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई की थी। इसी तरह बोरियाखुर्द के मार्बल मार्केट के पास भूस्वामी योगेश वर्मा द्वारा 1.16 हेक्टेयर जमीन पर किए जा रहे अवैध प्लाटिंग को रोका था। इसमें 50 फीसदी प्लॉट बिक गया है। इसे वैध बनाकर इससे टैक्स जनरेट करने के लिए निगम ने प्रबंध अधिग्रहण की कार्रवाई की है। यह कार्रवाई नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 की धारा 292 (च) के तहत की गई है। ऐसे निकाल सकेंगे अंतर राशि दावा आपत्ति के निराकरण के बाद निगम यहां विकास कार्य शुरू करेगा। इसका खर्च भी यहां के भूस्वामियों से निकाला जाएगा। जोन क्र. 10 कमिश्नर विवेकानंद दुबे ने बताया कि विकास कार्यों के कुल खर्च को सभी प्लॉट में बराबर बांटा जाएगा। इसी अंतर राशि को हर प्लॉट का मालिक निगम को देगा, जिसके बाद यहां विकास कार्य होगा। अब आसानी से अंतर राशि को साथ में अदा करके खरीद पाएंगे।


