भास्कर न्यूज | खड़गपुर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के प्लेटिनम जयंती समारोह के अंतर्गत आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय लोक संगीत महोत्सव ‘सुर-जहान 2026’ का शुक्रवार से आगाज हुआ। तीन दिवसीय यह महोत्सव 30 जनवरी से एक फरवरी 2026 तक आयोजित किया जायेगा, जिसमें देश और विदेश के लोक कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। आईआईटी खड़गपुर प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, महोत्सव का आयोजन संस्थान परिसर स्थित कालिदास सभागार और रामानुजन एरीना में किया गया। प्रतिदिन सायंकाल अंतरराष्ट्रीय और भारतीय लोक कलाकारों की भव्य संगीत व नृत्य प्रस्तुतियां होंगी, जबकि दिन के समय लोक संगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और विभिन्न सांस्कृतिक शैलियों पर आधारित कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य लोक संगीत की परंपराओं को समझना और नई पीढ़ी से जोड़ना है। सुर-जहान 2026 के अंतरराष्ट्रीय मंच पर डेनमार्क का रेडिएंट आर्केडिया, हंगरी का फोल्कर बैंड, लातविया का सॉसेजास और स्पेन का विगुएला अपनी विशिष्ट लोक संगीत परंपराओं की प्रस्तुतियां पेश की। वहीं भारत की लोक सांस्कृतिक धरोहर को गुजरात के सिदी गोमा और बंगाल के बाउल कलाकार जीवंत रूप में प्रस्तुत किये इसके अतिरिक्त पश्चिम बंगाल की पारंपरिक चादर-बदर और ओडिशा की दुरुआ गीत-नृत्य की प्रस्तुतियां भी महोत्सव का विशेष आकर्षण है। इस मौके पर विभिन्न देशों से आए लोक कलाकारों ने अपने पारंपरिक संगीत और नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति की डेनमार्क, हंगरी, लातविया और स्पेन के कलाकारों के साथ-साथ भारत के अलग-अलग राज्यों से आए लोक कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हुए पूरे माहौल को सुरों और तालों से भर दिया। वहीं वक्ताओं ने बताया कि ‘सुर-जहान’ केवल एक संगीत महोत्सव नहीं है, बल्कि यह विश्व की विविध संस्कृतियों को एक मंच पर लाने, आपसी संवाद को बढ़ावा देने और शांति व सद्भाव का संदेश देने वाला एक सशक्त माध्यम है।आईआईटी खड़गपुर के प्लेटिनम जयंती वर्ष में इस महोत्सव का आयोजन संस्थान की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता, सामाजिक सरोकार और वैश्विक दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।


