भास्कर न्यूज | हजारीबाग आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तहत कृषि संकाय की ओर से आयोजित पशुधन की उत्पादकता और खेती-बाड़ी से होने वाले लाभ पर राष्ट्रीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। तीन दिवसीय कार्यशाला में देशभर से कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी और छात्र शामिल हुए। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के डॉ. रवींद्र कुमार ने जलवायु-सहनशील पशुपालन को टिकाऊ कृषि की आवश्यकता बताया। बीवीसी-बासु, पटना के डॉ पुष्पेंद्र कुमार सिंह ने प्रजनन तकनीकों की नई संभावनाएं साझा की। तीसरे दिन रांची कृषि महाविद्यालय के डॉ निशांत पटेल ने प्रिसिजन लाइवस्टॉक फार्मिंग पर चर्चा करते हुए कहा कि सेंसर और ऑटोमेटेड सिस्टम किसानों को रियल-टाइम निगरानी का लाभ देते हैं। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के डॉ. शिव वरन सिंह ने ग्रामीण उद्यमिता पर बल देते हुए कहा कि डेयरी, पोल्ट्री व बकरी पालन आधारित वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। वहीं गुमला के डॉ. मनमोहन कुमार ने एकीकृत पशुधन-फसल-मत्स्य प्रणाली को लाभकारी बताया। समापन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीके नायक ने कहा कि यह आयोजन भविष्य की कृषि क्रांति की दिशा में ठोस कदम है। कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि परंपरा और विज्ञान के मेल से ही ग्रामीण भारत आत्मनिर्भर बनेगा। कृषि संकाय डीन सह कार्यशाला संयोजक डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि किसानों और शोधकर्ताओं को नई तकनीक से जोड़ना ही इस कार्यशाला का उद्देश्य था, जो सफलतापूर्वक पूरा हुआ। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।


