आगर मालवा में अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसलों के मुआवजे को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है। प्रदेश के 13 जिलों में मुआवजा राशि किसानों के खातों में डाली जा चुकी है, लेकिन आगर मालवा को इससे वंचित रखा गया है। इस मुद्दे पर भाजपा जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक के विरोधाभासी बयानों ने सियासत को और गरमा दिया है। सुसनेर विधायक का सरकार पर निशाना सोमवार को सुसनेर विधायक भेरूसिंह बापू ने जिला मुख्यालय पर प्रेसवार्ता कर सरकार और भाजपा नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने बताया कि एक ओर भाजपा जिलाध्यक्ष ओम मालवीय किसानों को जल्द मुआवजे का आश्वासन दे रहे हैं, वहीं पूर्व विधायक मुरलीधर पाटीदार द्वारा साझा की गई प्रशासनिक रिपोर्ट में जिले में फसल नुकसान ‘निरंक’ (शून्य) बताया गया है। विधायक बापू ने इसे किसानों के साथ सरासर अन्याय करार दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के खेतों में फसलें सूख गईं, भुट्टे सड़ गए और सोयाबीन झुलस गया, फिर भी रिपोर्ट में नुकसान शून्य दिखाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वे को जानबूझकर प्रभावित किया गया ताकि आगर मालवा को मुआवजे की सूची से बाहर रखा जा सके। विधायक बापू ने चेतावनी दी कि यदि शासन ने सर्वे रिपोर्ट की पुनः जांच की मांग नहीं मानी, तो कांग्रेस किसानों के साथ सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी। भाजपा बोली- ‘डंके की चोट पर’ दिलाएंगे मुआवजा दूसरी ओर, भाजपा जिलाध्यक्ष ओम मालवीय ने भी प्रेसवार्ता कर ‘डंके की चोट पर’ पीड़ित किसानों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। प्रशासन ने भी पुनः सर्वे रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजने की बात कही है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद अब केवल किसानों का मुद्दा नहीं रहा। अब यह जिले की राजनीति का केंद्र बन गया है और आगामी चुनावों पर भी इसका असर पड़ना तय है। किसान फिलहाल मुआवजे की आस लगाए हुए हैं और ‘निरंक सर्वे’ को लेकर पूरे जिले में असंतोष चरम पर है।


