भास्कर संवाददाता| पाली आचार्यश्री भिक्षु की महाप्रयाण स्थली सिरियारी समाधि स्थल में द्वि दिवसीय मंगल प्रवास करने के बाद आचार्यश्री महाश्रमणजी रविवार सुबह की मंगल बेला में सिरियारी से पुनः विहार शुरू किया। सिरियारी की जनता को मंगल आशीष प्रदान करते हुए आचार्यश्री आगे बढ़े तो सर्दी का प्रभाव दिखाई दे रहा था। मार्ग में अनेक स्थान पर लोगों ने आचार्यश्री के दर्शन किए तो आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। रविवार को आचार्यश्री अपनी धवल सेना के निम्बली गांव में भी पधारे। वहां के लोगों को मंगल आशीर्वाद देकर आगे बढ़ चले। मांडा गांव निवासी श्रद्धालु अपने आराध्य के अभिनंदन के लिए उत्साहपूर्वक प्रतीक्षा कर रहे थे। आचार्यश्री जैसे मांडा गांव के निकट पधारे तो श्रद्धालुओं ने बुलन्द जयघोष के साथ अपने अनुशास्ता स्वागत किया। भव्य स्वागत जुलूस के साथ आचार्यश्री माण्डा गांव निवासी प्यारेलाल पितलिया के निवास स्थान श्री महाश्रमण कुटीर में पधारे। आचार्यश्री महाश्रमण ने पावन प्रतिबोध करते हुए कहा कि जैन परंपरा में चौबीस तीर्थंकरों की बात बताई गई है। वर्तमान अवसर्पिणी में तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ हुए। आज पौष कृष्णा दसमी को पार्श्व जयंती मनाई जाती है। भगवान पार्श्व की लोकप्रियता काफी नजर आती है। भगवान पार्श्व को पुरुषादानीय अलंकरण से अलंकृत किया गया है। जितने मंदिर भगवान पार्श्व के मिलते हैं, उतने अन्य तीर्थंकरों के उतने नहीं मिलते हैं। भगवान पार्श्वनाथ या अन्य तीर्थंकरों की वाणी ग्रन्थ बन जाते हैं। उनकी वाणी से कितनों का कल्याण हो सकता है। आचार्यश्री ने उनकी स्तुति में प्रभु पार्श्व देव चरणों में शत-शत प्रणाम हो गीत का आंशिक संगान किया। आज के दिन हमारा माण्डा गांव में आना हुआ है। आचार्यश्री भिक्षु से भी जुड़ा हुआ है और आशोजी से किसी रूप में जुड़ा हुआ है।


