छत्तीसगढ़ के बस्तर में आज प्रसिद्ध गोंचा पर्व मनाया जाएगा। कुल 2 रथों में भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र के कुल 22 देव विग्रहों को विराजित कर रथ यात्रा निकाली जाएगी। वहीं भक्त भगवान को बांस की बनी तुपकी से सलामी देंगे। एक दिन पहले नेत्रोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जगदलपुर में आज शाम करीब 4 बजे रथ यात्रा निकलेगी। सिरहसार भवन के सामने स्थित जगन्नाथ मंदिर से रथ यात्रा निकलकर गोलबाजार, दंतेश्वरी मंदिर चौक होते हुए ये रथ यात्रा सिरहासार पहुंचेगी। इस भवन को जनकपुरी बनाया गया है। जहां भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र के देव विग्रहों को स्थापित किया जाएगा। 11 जून को शुरू हुआ पर्व इस साल 11 जून को देव स्नान पूर्णिमा के दिन से गोंचा पर्व शुरू हुआ है। 12 से 25 जून तक भगवान अनसर काल में थे। इस बीच भगवान के दर्शन वर्जित थे। पुजारी भगवान को काढ़ा समेत अन्य भोग लगाए। जिससे भगवान जल्दी स्वस्थ हो जाएं और फिर अपने भक्तों को जल्दी दर्शन दे सकें। 26 जून को नेत्रोत्सव हुआ। वहीं आज यानी 27 जून को गोंचा की रथ यात्रा होगी। भगवान अपनी मौसी के घर जनकपुरी जाएंगे, फिर सिरहासार में देव विग्रहों को स्थापित किया जाता है। इन 9 दिनों में कई श्रद्धालु अपने बच्चों का मुंडन करवा सकते हैं। मन्नत मांगने आ सकते हैं। ये है मान्यता करीब 618 साल पहले बस्तर के तत्कालीन राजा पुरुषोत्तम देव दंडवत करते हुए पुरी के जगन्नाथ मंदिर गए थे। वहां उन्हें रथपति की उपाधि दी गई थी। उन्हें 16 चक्कों का एक विशाल रथ भी भेंट किया गया था। 16 पहियों वाले रथ को तेजी से खींचकर बस्तर लाना मुश्किल था। इसलिए जब राजा इस रथ को लेकर बस्तर आए तो उन्होंने इस रथ के 3 हिस्से कर दिए थे। जिसमें एक 8 का और 2 रथ 4-4 चक्के में बांट दिया था। ऐसे बंटा रथ और शुरू हुआ गोंचा पर्व 8 चक्के का एक और 4 चक्के का एक रथ बस्तर दशहरा और एक अन्य 4 चक्के का रथ बस्तर गोंचा के लिए दिया गया। जिसके बाद से ही बस्तर में गोंचा पर्व की शुरुआत हुई थी।


