सिटी रिपोर्टर| रांची आदिवासी संघर्ष मोर्चा व झारखंड जनाधिकार महासभा ने मंगलवार को कॉर्पोरेट लूट, राज्य दमन और आदिवासी संघर्ष पर एक परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किया। नामकुम बगईचा में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड-छत्तीसगढ़ क्षेत्र में माओवादी उन्मूलन के नाम पर जारी हिंसा, राज्य दमन और कॉरपोरेट लूट की गहन समीक्षा की गई। जिसमें कहा गया कि झारखंड की अबुआ सरकार में आदिवासी लोगों के उत्पीड़न और जमीन लूट की घटनाएं बढ़ी हैं। माओवाद खात्मा के नाम पर ग्रामीण युवाओं का शोषण जारी है। आदिवासी संघर्ष मोर्चा के राज्य सचिव देवकीनंदन बेदिया ने सवाल उठाया कि जब माओवादी संगठनों ने युद्धविराम और शांतिवार्ता की इच्छा जताई थी, तब संवाद की बजाय हिंसा क्यों चुनी गई? महासभा के दिनेश मुर्मू ने कहा कि यूएपीए, एसआईआर जैसे कानून आज दमन के हथियार बन चुके हैं। इन कानूनों के जरिए हजारों आदिवासी, युवा और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया है। भाकपा (माले) के राज्य सचिव मनोज भक्त, सीपीएम के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव, गौतम मुुंडा, मोती बेदिया, सुरेंद्र बेदिया, आदिवासी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष आर. डी. माझी, अल्मा खलखो, नंदकिशोर गंझू, नंदिता भट्टाचार्य सहित अन्य ने अपने विचार रखे।


