भास्कर न्यूज | कोडरमा जिले के मेघातरी पंचायत का ताराघाटी गांव, जो झारखंड- बिहार सीमा पर बसा है, आज भी शुद्ध पेयजल से महरूम है। नेशनल हाईवे के नजदीक बसे गांव में लगभग 40 से 45 अनुसूचित जाति परिवार रहते है। यहां के लोग पिछले कई वर्षों से कुएं या नलकूप के बजाय आधा किलोमीटर दूर पहाड़ी झरने से पानी लाने को विवश हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पूर्व में कुछ नलकूप लगाए गए थे, लेकिन जलस्तर नीचे होने से वे बेकार हो गए। वहीं जिन नलकूपों से पानी निकलता है, उसमें आर्सेनिक और फ्लोराइड की अधिकता होने के कारण वह पीने योग्य नहीं है। यही वजह है कि ग्रामीण झरने के गंदे और मिट्टी मिले पानी का सेवन करते हैं। झरने का पानी प्रदूषित होने से ग्रामीण अक्सर बीमार पड़ते हैं। गर्मियों में जब झरना सूख जाता है, तो बगल के कुएं से किसी तरह पानी की व्यवस्था की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और प्रशासन की उदासीनता से वे सालों से पीने के पानी की समस्या झेल रहे हैं। शिक्षा और योजनाओं से भी वंचित : गांव की बच्चियों ने बताया कि प्राइमरी स्तर तक पढ़ाई के बाद आगे की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ती है। वहीं कई गरीब परिवारों को अब तक आवास योजना, पेंशन और राशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाया है। मेघातरी पंचायत की मुखिया शीला देवी ने स्वीकार किया कि गांव में नलकूप लगाए गए थे, लेकिन पहाड़ी इलाका होने के कारण गहराई में पानी नहीं मिला।


