भास्कर संवाददाता | बड़वानी शासकीय पीजी कॉलेज में स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ ने स्टडी के साथ स्किल विषय पर संवाद कार्यक्रम किया। प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य ने बताया कॉलेज में एक दर्जन स्किल इनहांसमेंट कोर्सेस संचालित किए जा रहे हैं। इनसे विभिन्न क्षेत्रों में विद्यार्थियों को कौशल युक्त बनाया जा रहा है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रो. लोकेंद्र वर्मा ने कहा आज का दौर स्किल आधारित है। डिग्री व कागजों की डिमांड कम हो रही है, जबकि स्किल वाली डिमांड बढ़ रही है। एक स्किल वाला व्यक्ति नौकरी वाले व्यक्ति से ज्यादा कमा सकता है। उदाहरणस्वरूप, मेहंदी बनाने की स्किल से तीन-चार महीने के शादी सीजन में 10-15 हजार रुपए प्रतिदिन कमाए जा सकते हैं। लड़के भी मेहंदी बनाना सीख सकते हैं। स्किल महत्वपूर्ण है क्योंकि वे आत्मनिर्भरता प्रदान करती हैं। आधुनिक बाजार में स्किल्स ही प्रतिस्पर्धा में आगे रखती है। स्किल्स व्यक्ति को बहुमुखी बनाती हैं। स्किल्स आर्थिक स्वतंत्रता देती है। विशेषकर महिलाओं को। स्किल्स व्यक्तित्व विकास में सहायक है, आत्मविश्वास बढ़ाती है और नौकरी से आय के स्रोत बनाती है। स्किल्स लगातार अपडेट करने से कॅरियर मजबूत होता है। स्किल्स जीवन की आधारशिला है, जो चुनौतियों से लड़ने की शक्ति देती है। स्किल्स से व्यक्ति न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होता है, बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर पर भी विकास करता है। प्रो. वर्मा ने कहा कि पढ़ाई के साथ स्किल्स सीखना जरूरी है। पढ़ाई के साथ स्किल्स से छात्र बहुमुखी बनते हैं। मोबाइल की बजाय फोकस पढ़ाई और स्किल्स पर रखें। स्किल्स छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देती है। जैसे इवेंट मैनेजमेंट से टीमवर्क और नेतृत्व सीखें। पर्सनालिटी डेवलपमेंट से कम्युनिकेशन स्किल्स मजबूत होती है, जो इंटरव्यू और जॉब में फायदेमंद हैं। मेडिकल डायग्नोस्टिक जैसी स्किल्स हेल्थकेयर सेक्टर में अवसर खोलती है। इस दौरान हंसा धनगर, आरती धनगर, संजय सोलंकी, कन्हैयालाल फूलमाली, भोलू बामनिया, संजू डूडवे, दिव्या जमरे, डॉ. मधुसूदन चौबे सहित विद्यार्थी मौजूद थे।


