बलौदा बाजार के खैरी जिला पंचायत में आमंत्रण पत्र को लेकर विवाद सामने आया है। पंचायत ने सम्मान समारोह के लिए भेजे गए पत्र में एक सतनामी समाज के पंच के नाम के साथ ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग किया। गांव के पंच मुन्ना कोसले को भेजे गए आमंत्रण पत्र में उनके नाम के आगे ‘हरिजन’ शब्द लिखा गया था। यह शब्द संविधान के तहत प्रतिबंधित है। सतनामी समाज ने इसे अपमानजनक बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। सोमवार रात सतनामी समाज के लोग कोतवाली थाने पहुंचे और जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा गोलू जायसवाल, उपाध्यक्ष पवन साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। संविधान में हरिजन शब्द पर प्रतिबंध समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर के प्रयासों से हरिजन पर प्रतिबंध लगा है। यह शब्द दलित समाज को नीचा दिखाने के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। जिला पंचायत द्वारा इसका प्रयोग असंवैधानिक है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आमंत्रण पत्र में इस शब्द के इस्तेमाल की जांच की जा रही है। संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। आंदोलन की चेतावनी बता दें कि इस विवाद के बीच मंगलवार को जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का शपथ ग्रहण एवं सम्मान समारोह होना है। इस विवाद के बाद सतनामी समाज के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। सतनामी समाज की मांगें सुप्रीम कोर्ट ने बताया था अपमानजनक 2017 में नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि किसी भी सरकारी दस्तावेज, प्रमाण पत्र या आमंत्रण पत्र में इस शब्द का इस्तेमाल न किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने कई फैसलों में इसे अपमानजनक बताया है।


