{सर्वश्रेष्ठ सुझाव देने वाले तीन व्यक्ति या संस्था को सम्मानित किया जाएगा राज्य सरकार आमलोगों से सुझाव लेगी। आए सुझाव पर विशेषज्ञों से सलाह लेगी, फिर बजट को फाइनल करेगी। राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने रविवार को उक्त बातें कही। एप लॉन्चिंग के बाद प्रोजेक्ट भवन सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में किशोर ने कहा कि वर्ष 2025-26 के राज्य बजट के लिए निर्धारित अबुआ बजट पोर्टल और मोबाइल एप का शुभारंभ रविवार को हो चुका है। इसके अलावा आम लोग फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 17 जनवरी तक अपने बहुमूल्य सुझाव दे सकते हैं। आमजनों के सुझाव आने के बाद राज्य सरकार तय करेगी कि आगामी वार्षिक बजट कैसा होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि पारदर्शिता के साथ हर वर्ग को शामिल करते हुए बजट के लिए उनके सुझाव मांगे गए हैं। सर्वश्रेष्ठ सुझाव देने वाले तीन व्यक्तियों या संस्था को सम्मानित किया जाएगा। आमजनों के सुझावों पर वित्त विभाग की ओर से 16 और 17 जनवरी को दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें विशेषज्ञ से भी राय ली जाएगी। इसके बाद ठोस निचोड़ वाले फैसलों को सीएम हेमंत सोरेन के साथ विमर्श कर अबुआ बजट पेश किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस बार राजय के बजट के नाम में बदलाव किया गया है। पहले राज्य बजट का नाम हमिन कर बजट था। इस बार इसका नाम अबुआ बजट रखा गया है। प्रेस वार्ता में वित्त विभाग के प्रधान सचिव प्रशांत कुमार और वाणिज्य कर आयुक्त अमित कुमार भी मौजूद थे। झारखंडवासियों की भावनाओं के अनुरूप होगा बजट वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य की संस्कृति, सभ्यता और झारखंडवासियों की भावनाओं के अनुरूप ही बजट होगा। अबुआ बजट में गरीबों, शोषितों, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, सामान्य जाति के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों समेत हर वर्ग की आवश्यकता और उनकी उम्मीद के अनुरूप बजट होगा। जिसमें समाज के विद्वान, अर्थशास्त्रियों व प्रमुख सामाजिक संगठनों को भी आमंत्रित कर उनसे विचार लिए जाएंगे। केंद्र से 1.36 लाख करोड़ नहीं मिला तो कानूनी रास्ते से आगे बढ़ेंगे : मंत्री केंद्र से बकाया मद के 1.36 लाख करोड़ रुपए नहीं मिलने के सवाल पर राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य की मांग जायज है। बार-बार हमने आग्रह किया है, लेकिन केंद्र सरकार ध्यान नहीं दे रही है। वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने भारत सरकार के कैबिनेट मंत्रालय को एक पत्र लिखकर इस बाबत मांग रखी थी। झारखंड के अलग-अलग सेक्टरों में कितनी राशि केंद्र सरकार के समक्ष बकाया है, इसका भी उल्लेख था। लेकिन, इसका कोई जवाब नहीं आया। दूसरी बार साल 2023 में हेमंत सोरेन की सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर बकाया राशि के भुगतान करने की बात दोहराई थी। केंद्र को पत्र भेजा था। लेकिन, दोनों पत्रों का जवाब न देकर केंद्र ने लोकसभा में जवाब दिया कि झारखंड सरकार की केंद्र के पास कोई बकाया राशि नहीं है। अच्छा होता कि केंद्र सरकार झारखंड की तरफ से भेजे गए पत्र का विभागीय जवाब देती। उन्होंने कहा कि हम केंद्र सरकार से भीख नहीं, अपना हक मांग रहे हैं। केंद्र सरकार हमारे बकाए का भुगतान करें, नहीं तो कानूनी रास्ते से हम आगे जाएंगे। पोर्टल, एप व सोशल मीडिया के जरिए लोग 17 जनवरी तक भेज सकते हैं सुझाव अबुआ बजट पोर्टल व एप की लॉन्चिंग के दौरान सीएम व अन्य मंत्री। {16 व 17 जनवरी को बजट के लिए आयोजित की जाएगी कार्यशाला


