सुरिंदर सिंह | जालंधर बिजली विभाग के नियम केवल आम जनता के लिए बने हैं। एक तरफ जहां मामूली राशि का भुगतान न करने पर उपभोक्ता का मीटर काट दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी विभाग करोड़ों रुपए की बिजली इस्तेमाल कर चुके हैं , लेकिन उन पर कार्रवाई करने की हिम्मत विभाग नहीं जुटा पा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, करीब 122.86 करोड़ रुपए की राशि सरकारी विभागों पर बकाया है। पावरकॉम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं कि यदि किसी छोटे दुकानदार का बिजली बिल 20 से 25 हजार रुपए भी बकाया रह जाए, तो टीमें बिना देर किए कनेक्शन काटने पहुंच जाती हैं। घरों में अंधेरा छा जाता है और जुर्माना भरने के लिए लोगों को दर-दर भटकना पड़ता है। इसके विपरीत 39 सरकारी विभाग पावरकॉम की डिफाल्टर लिस्ट में शामिल हैं। जिन्होंने सालों से बिजली बिलों का भुगतान नहीं किया पर इनके कनेक्शन नहीं जाते हैं। 39 में से 15 विभाग सुपर डिफाल्टर की सूची में बकायेदारों की लिस्ट लंबी है, लेकिन इसमें 15 विभाग ऐसे हैं जिन्हें टॉप डिफाल्टर कहा जा सकता है। इन चुनिंदा विभागों पर बकाया राशि का आंकड़ा 1 लाख रुपए से लेकर 58 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा है। पहले नंबर पर नगर निगम हैं, जिसने 58 करोड़ रुपए बिजली विभाग का बिल का देना है। 38.50 करोड़ रुपए बकाए के साथ दूसरे नंबर पर वाटर सप्लाई एंड सेनिटेशन और 11.44 करोड़ रुपए बकाए के साथ तीसरे नंबर पर हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर विभाग है। विभागों को लगातार नोटिस जारी किए जा रहे ^वॉटर सप्लाई और अस्पताल को छोड़ कर बाकी विभागों को लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जिन विभागों ने बिल जमा नहीं करवाए हैं। उनको लेकर चीफ सेक्रेटरी तक मीटिंग भी हुई है। डिफाल्टिंग अमाउंट वाले विभागों के कनेक्शन भी काटे जाते हैं। लेकिन कुछ पैसे जमा करवाकर फिर से सप्लाई चालू करवा लेते हैं। उम्मीद है कि मार्च से पहले काफी हद तक इन विभागों से रिकवरी करवा ली जाएगी। – देसराज बांगड़, चीफ इंजीनियर, पावरकॉम आम जनता पर अतिरिक्त सरचार्ज लगाकर भरपाई पावरकॉम केवल उन विभागों पर कार्रवाई नहीं करता है, जहां बिजली की सबसे ज्यादा जरुरत है। इनमें नगर निगम, पुलिस और अन्य प्रशासनिक कार्यालय शामिल हैं, जो जनता से तो हर तरह का टैक्स वसूलते हैं, लेकिन खुद बिजली के बिलों का भुगतान करना भूल जाते हैं। अगर आम जनता के कनेक्शन काटे जाते हैं तो सरकारी विभागों के भी काटे जा सकते हैं। पावरकॉम उन विभागों को नोटिस भी जरूर जारी करता है, जो डिफॉल्टर लिस्ट में शामिल है। उनके कनेक्शन काटने के लिए हेड अॉफिस से परमिशन भी मिल जाती है। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। करोड़ों रुपए की यह रिकवरी न होने के कारण पावरकॉम को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस घाटे की भरपाई अक्सर बिजली की दरों में वृद्धि करके या आम जनता पर अतिरिक्त सरचार्ज लगाकर की जाती है। टॉप डिफाल्टर विभाग की सूची आरके चौधरी, रिटायर्ड एसडीओ, पावरकॉम {नगर निगम पर 58.53 करोड़ {वाटर सप्लाई एंड सेनिटेशन विभाग पर 38.50 करोड़ रुपए {हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर 11.44 करोड़ रुपए {पावर 1.20 करोड़ रुपए {इरीगेशन विभाग पर 80.56 लाख {इन्वेसटमेंट प्रमोशन 26.17 लाख {डिपार्टमेट ऑफ हायर एजुकेशन 16.16 लाख रुपए {लोक निर्माण विभाग पर 4.45 करोड़ रुपए {एनआरआई अफेयर 44.26 लाख {स्कूल एजूकेशन 73 लाख रुपए {गर्वनरनेंस रिफॉर्म 42 लाख रुपए {होम अफेयर एंड जेल 74.62 लाख रुपए {इंडस्ट्री एंड कॉमर्स 18.37 लाख {रेवेन्यू रिहाबिलीटेशन एंड िडजास्टर मैनेजमेंट 63.53 लाख {रुरल डिवेलपमेंट एंड पंचायत विभाग पर 3.55 करोड़ रुपए {साइंट एंड टैक्नॉलाजी एंड एनवायरमेंट 19.86 लाख रुपए {सोशल सिक्योरिटी एंड डिवेलपमेंट अॉफ विमेन – चिल्डर्न 5.58 लाख {स्पोर्ट्स एंड यूथ सर्विस 6.59 लाख रुपए


