आरके अस्पताल में 119 पदों पर भर्ती का मामला, नियम 3 साल में हटाने का बताकर पुराने कर्मचारियों को लगाए रखा

भास्कर न्यूज | राजसमंद आरके जिला अस्पताल में ठेके पर कर्मचारियों को लगाने के लिए नई प्लेसमेंट एजेंसी आशापुरा सिक्योरिटी गार्डस एवं भूतपूर्व सैनिक सोसाइटी बाली को गत दिनों टेंडर मिला है। नए एनजीओ के माध्यम से राजसमंद राजकीय आरके अस्पताल में विभिन्न पदों पर 119 कार्मिकों को लगाना था। अधिकांश पदों पर पुराने कार्मिकों को ही लगा दिया गया, लेकिन नर्सिंगकर्मी के पदों पर गड़बड़ी सामने आई है। अस्थाई नर्सिंगकर्मी भर्ती में नियम-कायदे दरकिनार करके मेरिट, योग्यता, अनुभव कुछ भी नहीं देखा गया। केवल एक सादे आवेदन पत्र पर नर्सिंग स्टाफ की जॉइनिंग करवा दी गई। अस्पताल में मरीजों के उपचार व देखरेख जैसे गंभीर मामले में इस प्रकार से नई भर्ती एक गंभीर विषय है। एनजीओ के माध्यम से इस बार नर्सिंगकर्मी के कुल 23 पदों में से 8 पुराने नर्सिंगकर्मियों को हटाकर नए नर्सिंगकर्मी को ज्योइंन करवा दिया। आठ नर्सिंगकर्मियों को हटाने संबंधित नोटिस भी जारी नहीं किया गया। सात साल पुराने नर्सिंगकर्मी हटाए जाने पर अब अस्पताल, कलेक्ट्री व राजनेताओं के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि इनका वेतन आठ हजार रुपए प्रतिमाह है, लेकिन भविष्य में सरकारी नौकरी में अनुभव के अंक जुड़ते हैं। सरकारी नौकरी में तीन साल अनुभव के 30 अंक मिलते हैं। अस्थाई नौकरी के लिए राजनीतिक अप्रोच : आरके अस्पताल हर साल एनजीओ बदल देता है, लेकिन एनजीओ एकदम से कर्मचारियों को नहीं बदलता है। अस्पताल प्रशासन की मिलीभगत से उनको हटाना या उनके चेहतों या राजनीतिक अप्रोच वाले कार्मिकों को लगाया जाता है। इस बार भी आठ नर्सिंग कर्मियों को हटा दिया गया। एनजीओ नई भर्ती के लिए कोई विज्ञप्ति जारी नहीं करता : आरके अस्पताल में नए एनजीओ द्वारा भर्ती को लेकर किसी प्रकार की कोई सार्वजनिक घोषणा और न ही विज्ञप्ति जारी की गई। इससे कई योग्य उम्मीदवार आवेदन ही नहीं कर पाए और वंचित रह गए। जबकि एनजीओ का कहना है कि हम तीन साल से जमे हुए कार्मिकों को हटाकर नए कार्मिकों को अवसर देते हैं। जिससे उनको तीन साल के अनुभव का सरकारी नौकरी में लाभ मिल सके, लेकिन ऐसा ना तो नियम है न ही एनजीओ ने इस बार की भर्ती में प्रक्रिया में किया है। क्योंकि 119 पदों में अधिकांश पर पुराने कार्मिकों को ही लगा दिया है। ^हमारे पास अस्पताल से सूची आती है, उसके आधार पर इनको फिर से जॉइनिंग दी जाती है। जिनको भी हटाया था, उनकी पूर्व में कमियों की वजह से हटाया गया है। जो भी लगाया जाता है। अस्पताल की रिकमडेंड के आधार पर ही लिया जाता है। -जितेंद्र सिंह, आशापुरा सिक्योरिटी गार्ड्स एवं भूतपूर्व सैनिक सोसाइटी बाली आरके अस्पताल के पीएमओ डॉ. रमेश रजक ने बताया कि हर साल प्लेसमेंट एजेंसी बदलती रहती है। हम केवल उनको पद व कर्मचारियों की संख्या जरूरत बताते हैं। एनजीओ के माध्यम से उन पदों पर अस्थाई भर्ती की जाती है। इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं होता है। उनको लगाना, हटाना हमारे हाथ में नहीं होता है।आरके अस्पताल प्लेसमेंट एजेंसी को साल के 1 करोड़ 20 लाख रुपए का भुगतान करती है। इसमें से ही एनजीओ वाले उनके द्वारा लगाए कर्मचारियों को भुगतान करते हैं। नए या पुराने कार्मिकों के किसी प्रकार के आवदेन पत्र या डाक्यूमेंट हमारे पास नहीं रहते। यह सब एनजीओ के माध्यम से ही किया जाता है। जबकि कार्मिक आरके अस्पताल के अधीन काम करते हैं। उनको डॉक्टर या अन्य उच्चधिकारियों के आदेश की पालना करनी होती है।

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