घुमंतू, अर्धघुमंतू एवं विमुक्त (डीएनटी) समाज द्वारा 18 जनवरी को अलवर के भर्तृहरि धाम में एक जनसभा का आयोजन किया है जिसमें प्रदेश भर से करीब 5 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना बताई गई है। इस जनसभा मुख्य उद्देश्य समाज की लंबित 10 सूत्री मांगों को लेकर राज्य सरकार पर प्रभावी दबाव बनाना है। जिसमे 32 जातियां शामिल है। नाथ समाज के नेतृत्व में होने वाली इस सभा में राजस्थान सहित विभिन्न जिलों से हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है। डीएनटी समाज की प्रमुख मांगों में 10 प्रतिशत पृथक आरक्षण शामिल है, जिसकी सिफारिश रेनके आयोग और ईदाते आयोग पहले ही कर चुके हैं। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय भी आरक्षण के उप वर्गीकरण के निर्णय में आरक्षण के भीतर आरक्षण की व्यवस्था को मान्यता दे चुका है।
इससे पहले समाज ने पाली जिले के बालराई में बड़ा आंदोलन किया था, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे और करीब 30 घंटे तक हाईवे जाम रहा था। इसके बाद 5 दिसंबर 2025 को डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राईका और प्रदेशाध्यक्ष रतननाथ कालबेलिया के नेतृत्व में सरकार से वार्ता हुई थी।
वार्ता के दौरान सरकार के समक्ष आरक्षण के साथ-साथ पट्टे, आवास एवं भूमि आवंटन, पंचायतों में राजनीतिक आरक्षण, शिक्षा एवं छात्रावासों के लिए बजट बढ़ाने तथा कला महाविद्यालय की स्थापना जैसी मांगें रखी गई थीं। सरकार ने इन सभी मांगों पर विचार के लिए दो माह का समय मांगा था, जिसकी अवधि 5 फरवरी को समाप्त हो रही है। संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष सत्यम योगी व उर्मिला योगी ने प्रेस कान्फ्रेंस में चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ, तो दोबारा बड़ा आंदोलन किया जाएगा। डीएनटी समाज का महत्वपूर्ण घटक नाथ समाज इस आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सभा में राष्ट्रीय पशुपालक संघ के अध्यक्ष लालजी राईका, घुमंतू-अर्धघुमंतू विमुक्त जाति परिषद के प्रदेशाध्यक्ष रतननाथ कालबेलिया, डीएनटी बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष उर्मिला योगी सहित कई समाज प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। आयोजन के संयोजक पुखराज योगी और उनकी टीम हैं।


