भास्कर न्यूज | अमृतसर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के गायब पावन स्वरूपों का मामला वीरवार को उस समय गर्मा गया जब शिअद अमृतसर के वर्करों को पुलिस ने एसजीपीसी मुख्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया। पुलिस ने श्री गुरु रामदास लंगर हाल गेट पर ही वर्करों को 2 घंटे तक रोके रखा। वर्करो को रोकने के चलते शिअद अमृतसर के कार्यकारी प्रधान ईमान सिंह मान और एडीसीपी हरपाल सिंह के बीच बहसबाजी भी हुई। प्रवेश की इजाजत न देने के नतीजतन ईमान सिंह मान, हरपाल सिंह बलेर तथा अन्य महिला वर्करों ने एसजीपीसी अधिकारी बिजै सिंह को लंगर हाल गेट के समक्ष ही ज्ञापन दिया। ज्ञापन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 गायब पवित्र स्वरूपों के प्रकरण में निष्पक्ष जांच फिर से करवाने की मांग की गई है। इस दौरान वर्करों ने नारेबाजी भी की। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की धर्म प्रचार कमेटी के पंजाब इकाई के चेयरमैन मनजीत सिंह भोमा, भाई मोहकम सिंह और बाबा मेजर सिंह ने कहा कि पावन स्वरूपों के मामले में आरोपियों को बचाने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ढाल न बनें। जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज आरोपियों को बेनकाब करने की बजाय ढाल बनकर बचाने में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जत्थेदार को पंजाब सरकार द्वारा करवाई जा रही जांच में सहयोग करने के लिए एसजीपीसी को आदेश देना चाहिए। जांच में रुकावट डालने वाले प्रत्येक व्यक्ति या अधिकारी को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किया जाना चाहिए। असली गुनहगार को पंथ के सामने लाया जाना चाहिए, फिर चाहे गुनाहगार कितने भी बड़े पद पर आसीन क्यों न हो। इस मौके पर बाबा मेजर सिंह, भाई कुलविंदर सिंह अरदासियां, जसबीर सिंह मंडियाला, राजविंदर सिंह मौजूद थे। ईमान सिंह मान ने कहा कि 328 पवित्र स्वरूपों के मामले में एसजीपीसी की नाकामी के नतीजन उन्हें उनकी ज़िम्मेदारी याद दिलाने के मकसद से चूडियां सौंपने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि दोषियों की जानकारी होने के बावजूद एसजीपीसी ने अपने स्तर पर आरोपियों के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज नहीं करवाया था। उन्होंने दावा किया कि अगर सुखबीर सिंह बादल से जुड़ी कंपनियों में सीए सतिंदर सिंह कोहली द्वारा कोई घपला किया होता तो तुरंत कोहली पर दर्जनों क्रिमिनल केस दर्ज हो जाने थे। इसके अलावा ईमान सिंह मान ने कहा कि 15 जनवरी को पारदर्शिता के तहत मुख्यमंत्री भगवंत मान और जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज के बीच लाइव बातचीत होनी चाहिए, सार्वजनिक तौर से मीडिया के समक्ष स्पष्टीकरण लेते हुए वार्तालाप होनी चाहिए।


