भास्कर न्यूज | लुधियाना कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को अब स्किल बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसको लेकर यूजीसी ने हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में स्किल्ड बेस्ड कोर्सेस लागू करने के उद्देश्य से नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत यूजीसी ने उच्च शैक्षणिक संस्थानों को स्किल बेस्ड कोर्स और माइक्रो क्रेडेंशियल शुरू करने के लिए कहा है। यूजीसी के अनुसार नई शिक्षा नीति के तहत किए जा रहे इन बदलावों का उद्देश्य स्टूडेंट्स को जॉब मार्केट के लिए तैयार करना है। उन्हें प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री के अनुसार स्किल से लैस करना है। स्टूडेंट्स को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जो उनके भविष्य में काम आए। निर्देश में कहा है कि इंडस्ट्री की जरूरतों के साथ शैक्षिक नॉलेज को भी ध्यान में रखा जाएगा। स्टूडेंट्स के थ्योरी नॉलेज में प्रैक्टिकली उन्हें स्किल बनाने पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। हालांकि यूजीसी द्वारा स्किल डेवलपमेंट को लेकर कई तरह के प्रयास किया जा रहे हैं और इन्हें उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू करने के भी निर्देश है लेकिन जमीन स्तर पर अभी कई तरह की समस्याएं होने के कारण इन्हें लागू करने में भी कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अध्यापकों के अनुसार संस्थाओं को नियमों को लागू करने के संबंध में गाइडेंस भी दी जानी चाहिए जिससे कि पॉलिसी को सही ढंग से लागू किया जा सके और स्टूडेंट्स को इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सके। नए सिस्टम के तहत मौजूदा करिकुलम में स्किल कोर्स को शामिल कर यूजी और पीजी स्टूडेंट्स को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डिजिटल मार्केटिंग, डेटा एनालिटिक्स, फीचर राइटिंग, साहित्यिक पत्रकारिता, संघर्ष समाधान, डिजिटल वकालत, टिकाऊ कृषि, डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग, ई कॉमर्स, फैशन मार्केटिंग, रसद और आपूर्ति श्रृंखला जैसे विषयों के संपर्क में ला सकते हैं। आर्ट्स के विषयों में भी एआई को लागू किया जाएगा। यूजीसी के अनुसार उद्योग संबंधित कौशल अंतराल को संबंधित करके स्वरोजगार के साथ-साथ छात्रों के रोजगार के अवसरों को बढ़ाने का एक प्रयास है। यूजीसी ने माइक्रो क्रेडेंशियल और स्किल बेस्ड कोर्स को फ्लेक्सिबल कर दिया है। उच्च शिक्षा संस्थानों को कुल क्रेडिट सीमा अधिकतम पर 50 फीसदी के साथ स्किल कोर्स प्रदान करने की अनुमति होगी। स्किल यूनिवर्सिटी के लिए क्रेडिट सीमा कुल क्रेडिट का 60 फीसदी है। वहीं असाधारण मामलों में यूजीसी की जानकारी से इसे 70 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं इसके लिए जारी निर्देशों के अनुसार हायर एजुकेशन संस्थानों को अलग-अलग सब्जेक्ट में स्किल्ड-बेस कोर्सेस या माइक्रो-क्रेडेंशियल प्रदान करने की सुविधा होगी। ये कोर्सेस इंडस्ट्री यूनिट, स्किल डिवेलपमेंट सेंटर या प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशन के साथ पार्टनरशिप में किए जा सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे बाजार की मांगों को पूरा करते हैं। संस्थानों को इन प्रोग्रामों को डिजाइन करने के लिए नेशनल स्किल्ड डिवेलपमेंट निगम और सेक्टर स्किल काउंसलिंग के साथ सहयोग ले सकते है। इन कोर्सेस में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को पूरा होने पर सर्टिफिकेट दिया जाएगा। जो बाद में उनकी डिग्री में हेल्प करेगा। इसके अलावा ऑनलाइन क्लासेस और ऑफलाइन क्लासेस भी करने के निर्देश दिए हैं।


