आखिरकार वो दिन आ गया, जब रिम्स में नेत्र संबंधित रोगों का इलाज अपनी बिल्डिंग में होगा। 11 साल से रिम्स परिसर में बन रहे क्षेत्रीय नेत्र संस्थान का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। 18 जनवरी के बाद से यहां रोगियों का उपचार शुरू हो जाएगा। शुक्रवार को रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक ने पत्राचार कर नेत्र व ईएनटी के विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि 18 जनवरी तक अपना विभाग डिस्ट्रीब्यूशन प्लान के अनुरूप नई आरआईओ बिल्डिंग में शिफ्ट कर लें। पत्र में कहा गया है कि झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा निर्मित क्षेत्रीय नेत्र संस्थान का संयुक्त निरीक्षण निदेशक व अन्य अधिकारियों द्वारा किया गया था। साथ ही पुराने भवन का भी रेनोवेशन किया जाना है। इसके लिए नेत्र व ईएनटी विभाग को जल्द से जल्द आरआईओ बिल्डिंग में शिफ्ट कराने का निर्देश दिया गया है। जिसके बाद चिकित्सा अधीक्षक ने 18 जनवरी की तिथि तक विभाग शिफ्ट करने की बात कही है। हालांकि, सूचना है कि अभी भवन को उपयोग में लाया जाएगा, लेकिन इसका विधिवत उद्घाटन बाद में कराया जाएगा। 103 पद स्वीकृत, विशेषज्ञ डॉक्टरों की होगी नियुक्ति
संस्थान के संचालन के लिए रिम्स प्रशासन ने विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मियों समेत कुल 103 पद स्वीकृत किए हैं। रोस्टर क्लीयरेंस के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संस्थान के शुरू होने से मोतियाबिंद, कॉर्निया ट्रांसप्लांट, रेटिना, ग्लूकोमा और बच्चों की आंखों की जटिल बीमारियों का अत्याधुनिक इलाज संभव होगा। 11 साल तक बार-बार टलता रहा उद्घाटन, अब मिलेगा लाभ झारखंड के नेत्र रोगियों के लिए यह संस्थान 11 साल तक एक अधूरा सपना बना रहा। इस दौरान 10 से अधिक बार उद्घाटन की संभावित तिथियां तय की गईं, लेकिन हर बार कार्य अधूरा रह गया। मार्च 2020 की पहली डेडलाइन कोविड-19 के कारण टल गई। इसके बाद 2021, 2023 और 2024 में भी समय सीमा में काम पूरा नहीं हो सका। मुख्यमंत्री ने फरवरी 2025 तक निर्माण पूरा करने का निर्देश दिया था, वह भी नहीं हुआ। 2014 में 39.5 करोड़ से शुरू हुआ था निर्माण क्षेत्रीय नेत्र संस्थान का निर्माण वर्ष 2014 में स्टेडियम के समीप करीब तीन एकड़ भूमि पर शुरू किया गया था। भवन निर्माण विभाग को इसे दो साल में पूरा कर रिम्स को सौंपना था। शुरुआत में इसकी लागत 39.5 करोड़ रुपए आंकी गई थी, लेकिन समय के साथ अनुमान बढ़कर लगभग 85 करोड़ रुपए से अधिक हो गया। इसके बाद दोबारा डीपीआर तैयार की गई और पुनरीक्षित प्राक्कलन में करीब 45 करोड़ रुपए अतिरिक्त जोड़े गए। आठ मंजिला अत्याधुनिक भवन नेत्र संस्थान की आठ मंजिला इमारत को आधुनिक स्वरूप दिया गया है। पहली मंजिल पर रिसेप्शन और ओपीडी, दूसरी मंजिल पर निदेशक कक्ष और माइनर ओटी, तीसरी मंजिल पर मेजर ओटी, चौथी और पांचवीं मंजिल पर वार्ड, जबकि ऊपरी मंजिल पर सेमिनार हॉल और लेक्चर थिएटर बनाए गए हैं। संस्थान के शुरू होने से झारखंड ही नहीं, आसपास के राज्यों के नेत्र रोगियों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।वह सब जो आपके लिए जानना जरूरी है… मरीजों को मिलेगा एक छत के नीचे संपूर्ण इलाज क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के शुरू होने के बाद रेटिना, डायबिटिक रेटिनोपैथी और बाल नेत्र रोगों का इलाज एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगा। यहां आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे और पुराने, अनुपयोगी उपकरण हटाए जाएंगे। रिम्स आई बैंक के अनुसार, फिलहाल हो रहे कॉर्निया ट्रांसप्लांट की संख्या संस्थान शुरू होने के बाद दोगुनी तक बढ़ सकती है।


