केंद्रीय बजट 2024 में जीएसटी नियमों में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों को लेकर इंदौर में टैक्स विशेषज्ञों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन और चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की इंदौर शाखा द्वारा आयोजित इस सेमिनार में नए कर प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि नए नियमों के तहत किराये पर दी जाने वाली संपत्तियों के निर्माण से जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा अब समाप्त कर दी गई है। साथ ही, बजट में आयकर और कस्टम ड्यूटी से जुड़े नियमों में भी कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। सेमिनार में एमएसएमई सेक्टर को मिली राहत पर भी चर्चा की गई। सरकार ने छोटे और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए निवेश और टर्नओवर की सीमा में वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। इस कदम से देश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई के योगदान को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जीएसटी में `ट्रैक एंड ट्रेस’ सिस्टम लागू होगा एडवोकेट अंकुर अग्रवाल ने सभा को सम्बोधित करते हुए बताया कि सरकार द्वारा शीघ्र ही जीएसटी में `ट्रैक एंड ट्रेस’ सिस्टम लागू किया जा रहा है ! इसके साथ ही किसी एक पैन पर एक से अधिक रजिस्ट्रेशन होने पर कुछ कॉमन सर्विसेज के लिए हेड ऑफिस द्वारा इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन लेकर प्रत्येक रजिस्ट्रेशन पर उस क्रेडिट को बाटने के प्रावधान 1 अप्रैल 2025 से लागू किए जा रहे हैं। उक्त दोनों सिस्टम को लागू करने के लिए इस बजट में कुछ प्रावधान लाये गए है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सफारी रिट्रीट केस में जी. एस. टी. एक्ट के सेक्शन 17 के सब सेक्शन (5) के क्लॉज़ (डी) में प्रयुक्त शब्द प्लांट अथवा मशीनरी की व्याख्या कर ऐसे व्यावसायिक भवन आदि जिन्हे बनाकर किराये पर देने की दशा में प्रयुक्त इनपुट्स पर चुकाए गए जी. एस. टी. की टैक्स क्रेडिट निर्धारित शर्तों पर देने का निर्णय किया गया था। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को बहुत अधिक लाभ मिलने वाला था , परन्तु प्रस्तुत किये गए बजट में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को अप्रभावशील करने के लिए जी.एस.टी कानून में 01-जुलाई -2017 से परिवर्तन करने का प्रस्ताव है , फलस्वरूप माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार व्यापरियों को मिलने वाली राहत सरकार ने वापस ले ली है । ’’ इस कारण से बिल्डर्स को अब किराये पर दी जाने वाली बिल्डिंग के निर्माण पर क्रेडिट लेने की पात्रता नहीं रहेगी।अंकुर अग्रवाल ने अपने उदबोधन में यह भी बताया कि व्यापारियों द्वारा ग्राहकों या अन्य को वॉऊचर जारी करते समय भी जी.एस.टी. लगाने संबधी प्रावधान प्रचलन में है। प्रस्तुत किए गए बजट में, जी.एस.टी एक्ट के अंतर्गत जारी किए जाने वाले वाउचर्स पर जी.एस.टी का दायित्व वॉऊचर जारी करते समय नहीं लगाने संबंधी प्रस्ताव किया गया है। शासन की मंशा जी.एस.टी. की चोरी रोकने की प्रस्तुत बजट में कुछ विशिष्ट वस्तुओं जैसे सिगरेट, पान मसाला,तंबाकू के परिवहन पर निगरानी रखने के लिए ट्रैक एंड ट्रेस मैकेनिज्म पद्धति को लागू करने का प्रस्ताव है, इसके पीछे शासन की मंशा इन वस्तुओं पर, जी.एस.टी की चोरी रोकने की है। वर्तमान में जी.एस.टी. एक्ट में किसी भी बिंदु पर उरोक्त वर्णित प्रणाली प्रभावशील नहीं है। उन्होंने एम्एसएम्ई के संबंध में बात करते हुए बताया कि अब एम्एसएमई को परिभाषित करने के लिए निवेश की सीमा ढाई करोड़ एवं टर्नओवर की सीमा को बढाकर १० करोड़ कर दिया गया है जिससे एम्एसएम्ई सेक्टर को फायदा होगा। सूक्ष्म, लघु एवं माध्यम श्रेणी के सर्विस दाता एवं निर्माताओं के लिए टर्नओवर एवं निवेश राशि की सीमा में वृद्धि करके उन्हें विभिन्न सुविधाओं और क्रेडिट का लाभ प्रदान करने का प्रस्ताब है | उन्होंने कस्टम के प्रावधानों कि चर्चा करते हुए कहा कि अब कस्टम में प्रोविशनल असेसमेंट के लिए एक समय सीमा निर्धारित कर दी गयी है ! इसके अलावा कुछ जीवन रक्षक दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी कम कर दी गयी या उस पर ड्यूटी समाप्त कर दी गयी है। सी ए कृष्ण गर्ग ने बताया कि बजट में ऐसे प्रावधान लाये गए है जिसके अनुसार सप्लायर द्वारा क्रेडिट नोट जारी करने पर उसके द्वारा पूर्व में किए गए टैक्स के भुगतान की क्रेडिट उसे तभी मिलेगी जबकि उसके प्राप्तकर्ता ने उस क्रेडिट नोट से सम्बंधित क्रेडिट वापस कर दी हो। इसके अलावा पहले अपील करने पर केवल कर की मांग होने पर ही प्री -डिपाजिट करना होता था अर्थात केवल पेनल्टी की मांग पर कोई प्री डिपाजिट नहीं करना होता था। अब केवल पेनल्टी की मांग पर भी 10 प्रतिशत की दर से प्री-डिपाजिट करके ही अपील की जा सकेगी। एम्एसएम्ई की सीमा को बढ़ाने का स्वागत किया अध्यक्ष सीए जेपी सराफ ने एम्एसएम्ई की सीमा को बढ़ाने का स्वागत किया। उन्होंने किराए पर दी जाने वाली सम्पति के निर्माण पर क्रेडिट पर रोक लगाने के प्रावधानों को पुरानी तिथि से प्रभावी करने के सरकार के निर्णय को निराशाजनक बताया ! उन्होंने कहा कि सरकार से इतने समय से लड़ाई के बाद मिली रहत को सरकार ने प्रावधानों में एक शब्द का परिवर्तनं करके रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत से वंचित कर दिया !कार्यक्रम में सीए गोविन्द अग्रवाल, उमेश गोयल, निखिल जैन, नवीन खंडेलवाल, योगेश तलवार एवं बड़ी संख्या में कर सलाहकार, चार्टर्ड अकाउंटेंट उपस्थित थे।आभार प्रदर्शन एडवोकेट गोविन्द गोयल ने किया।


