इंदौर मेट्रो में 110 करोड़ का घोटाला…:गड्‌ढे भरने, मलबा फेंकने के लिए अलग से बिल लगाए चीफ कंट्रोलर की आपत्ति के बाद भी हो गया भुगतान

दो माह की पड़ताल में भास्कर ने जुटाए 17.47 करोड़ के भुगतान के दस्तावेज, टेंडर शर्तों में शामिल काम के लिए लिया दोहरा भुगतान मेट्रो के एमडी को भास्कर ने भेजी घोटाले की पूरी फाइल, अब जांच शुरू इंदौर मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर के​निर्माण में 110 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है। कॉन्ट्रैक्टर ने टेंडर और एग्रीमेंट की शर्तों को दरकिनार कर उन कार्यों के एवज में 110 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बिल लगाए जो उसे ही करने थे। इनमें मलबा फेंकने, गड्‌ढे भरने, चट्‌टान हटाने जैसे कामों के नाम पर भी भुगतान ले लिया गया। तत्कालीन चीफ कॉस्ट कंट्रोलर एम व्यंकटेश की आपत्ति के बावजूद अफसरों ने इन बिलों को स्वीकृत कर दिया। अब शिकायत चीफ विजिलेंस कमिश्नर से की गई है। ऐसे ही 17 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान के बिल की पूरी ई-फाइल भास्कर ने भी हासिल की। मेट्रो के नए एमडी एस कृष्ण चैतन्य को भी यह फाइल भास्कर ने भेजी, जिसके बाद मेट्रो प्रबंधन ने जांच शुरू की है। गांधीनगर से शहीद पार्क तक 1400 करोड़ में 17.5 किमी के कॉरिडोर में 11 किमी में एलिवेटेड वायाडक्ट और 16 स्टेशन का काम आरवीएनएल को 1400 करोड़ में दिया गया है। यह ईपीसी (इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंट्रक्शन) कॉन्ट्रैक्ट है। इसके तहत कॉन्ट्रैक्टर परियोजना के डिजाइन, इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण के लिए जिम्मेदार होता है। इसके तहत मेट्रो प्रबंधन किसी भी अतिरिक्त बदलाव के लिए अतिरिक्त भुगतान को बाध्य नहीं है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन – ई-फाइल की कॉपी, जिसमें साफ है, कैसे हुई गड़बड़ी भास्कर को अपनी दो महीने की पड़ताल में 17.47 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान की ई-फाइल मिली। इसमें जीएन-एस-6 वाया डक्ट की लोकेशन पर फाउंडेशन, सब-स्ट्रक्चर, सुपर स्ट्रक्चर के अतिरिक्त काम के कारण कॉन्ट्रैक्टर को 17.47 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान की पूरी डिटेल है। मेट्रो के पूर्व चीफ कॉस्ट कंट्रोलर एम व्यंकटेश ने बताया, ईपीसी कॉन्ट्रेक्ट में उन्हीं काम के लिए अतिरिक्त भुगतान किया जा सकता है, जो अलग से कराए हो, टेंडर शर्त में शामिल काम के लिए नहीं। चीफ विजिलेंस कमिश्नर से शिकायत एम व्यंकटेश ने भास्कर को बताया, मई-जून 2023 में कॉन्ट्रैक्टर ने एक दिन 110 करोड़ के बिलों को वैरिफाई करने के लिए दबाव बनाया। मैंने कहा, पहले के बिलों का ही वैरिफिकेशन नहीं हुआ है, ऐसे में नए बिलों को सर्टिफाई कैसे किया जा सकता है। सीनियर अफसरों ने भी दबाव बनाया। मैंने इंकार किया तो मेरी गैरमौजूदगी में प्रभारी से इन बिलों को सर्टिफाई कर भुगतान करवा दिया गया। इसका पता चलने के बाद मेरे द्वारा सेंट्रल चीफ विजिलेंस कमिश्नर को इसकी शिकायत कर दी गई है। सीधी बात – बसवाराज मसाली, आरवीएनएल हमने 110 करोड़ का अतिरिक्त काम किया है… आपने 110 करोड़ का अतिरिक्त मेट्रो से पैसा लिया?
– अभी प्रोसेस में चल रहा है, हमें पूरा पैसा नहीं मिला है।
ईपीसी कॉन्ट्रैक्ट में ज्यादा पैसा कैसे मांग सकते हैं?
– यह मेट्रो प्रबंधन से पूछिए, मेरा कुछ भी कहना ठीक नहीं।
जब डिजाइन और ड्राइंग आपकी ही है, तो वेरिएशन क्यों आए और इसके लिए बिल क्यों लगाए गए?
– हमें जो अतिरिक्त काम बताया गया है, उसी के अनुसार काम किया और राशि मांगी है, इस पर लंबी चर्चा हुई है। सीधी बात – एस कृष्ण चैतन्य, एमडी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन एक अफसर के कहने पर भुगतान नहीं होता 110 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान की शिकायत हुई है?
– भुगतान एक अधिकारी के कहने पर नहीं होता।
ईपीसी कॉन्ट्रैक्ट के बावजूद अतिरिक्त भुगतान क्यों?
– चार लेवल पर जांच के बाद ही भुगतान होता है, अगर कहीं गड़बड़ी हुई है तो सामने आ जाएगी।
सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर से शिकायत भी की गई है?
– सीवीसी की जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो सभी संबंधितों पर भ्रष्टाचार का केस बनेगा। विस्तृत जांच में आपके द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं की पड़ताल की जाएगी। ​​​​​​​

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