तेज रफ्तार से दौड़ रहे ई-रिक्शा को मोटर व्हीकल एक्ट से बाहर करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर बुधवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सुनवाई करते हए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ई-रिक्शा की धमाचौकड़ी से यातायात व्यवस्था बाधित हो रही है, इतना ही नहीं लगातार हादसे भी हो रहे हैं। याचिका जबलपुर निवासी डाॅ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव ने दायर की है, जिसमें कोर्ट ने 4 सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए है। भारत सरकार ने 2018 में नोटिफिकेशन जारी किया। जिसमें मोटर व्हीकल एक्ट के नियम 66 के तहत आदेश जारी किया गया कि ई-रिक्शा और बैटरी चालित वाहन को मोटर व्हीकल एक्ट के तहत लाया गया, उसी नोटिफिकेशन को नागरिक उपभोक्ता मंच ने हाईकोर्ट में चुनौती दिया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि यह नोटिफिकेशन मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि हजारों की संख्या में बेधड़क दौड़ रहे ई-रिक्शा से आए दिन हादसे हो रहे हैं। लोग घायल हो रहे हैं। इतना ही नहीं नाबालिग बच्चे भी इसे धड़ल्ले से दौड़ा रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि हाल ही में जबलपुर कलेक्टर ने भी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए स्कूलों में चल रहे ई-रिक्शा पर रोक लगाई थी, इसके बाद भी तेजी से ये सड़कों पर दौड़ रहे हैं। दिनेश उपाध्याय का कहना है कि भारत सरकार ने छूट दे रखी है, जिस वजह से ई-रिक्शा चलाने वालों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की अनिवार्यता भी नहीं है। इतना ही नहीं परमिट की भी आवश्यकता नहीं है, जिसके कारण ई-रिक्शा शहर से लेकर गांव तक की हर गली में चलते हुई नजर आ रहे हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि 12 से 14 साल के लड़के तेज रफ्तार से लोगों को बैठाकर गाड़ी दौड़ा रहे हैं। कानून में भी उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार सहित कलेक्टर,एसपी और आरटीओ को नोटिस जारी किया है। विधानसभा में भी उठा था मुद्दा जबलपुर उत्तर-मध्य विधानसभा से भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने भी विधानसभा में ई-रिक्शा के चलते यातायात की दुर्दशा पर मुद्दा उठाया था। भाजपा विधायक ने परिवहन मंत्री से पूछा था कि जुलाई 2025 की स्थिति में जबलपुर शहर में कुल कितने ई-रिक्शा वाहनों को कलर कोडिंग एवं नंबरिंग की गई थी, तथा उस समय कुल कितने ई-रिक्ता वाहन वास्तविक रूप में शहर में संचालित थे। जोनवार विवरण सहित जानकारी दें एवं यह भी बताएं की धरातल पर कलर कोडिंग फाॅर्मूला संचालित हैं, या केवल कागजों में ही शेष है ?। भाजपा विधायक ने यह भी सवाल किया था कि गत 6 माह में ऐसे बालकों पर कितनी कार्यवाही की गई है। जो कि बिना वैध लाइसेंस के वाहन चला रहे है। परिवहन मंत्री की और से जवाब दिया गया कि वर्तमान में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, जबलपुर में कुल 10,004 ई-रिक्शा वाहन पंजीकृत हैं। वर्तमान में कवर कोडिंग फॉर्मूला संचालित नहीं है। ये खबर भी पढ़ें… भोपाल में नहीं होगा पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन जबलपुर हाईकोर्ट ने तेज आवाज में बजने वाले डीजे को लेकर मध्यप्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। पूछा है कि इन पर प्रतिबंध लगाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की है? क्या कोई डायरेक्शन निर्धारित किए हैं। डीजे की आवाज कितनी होना चाहिए? पूरी खबर पढ़ें


