उज्जैन-झालावाड़ (वाया आगर) प्रस्तावित नई रेलवे लाइन का पहला सर्वे असफल हो गया है। अब पिपलोन होते हुए दूसरा सर्वे शुरू किया गया है। यह जानकारी क्षेत्रीय सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने रविवार को आगर के स्थानीय विश्राम गृह में बजट पर आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान दी। सांसद सोलंकी ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में बताया कि क्षेत्रवासियों को रेल सुविधा उपलब्ध कराना उनकी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए वे प्रधानमंत्री, रेल मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री के समक्ष कई बार मांग रख चुके हैं। सकारात्मक परिणाम मिलेंगे पहले सर्वे के असफल होने के कारणों पर सांसद ने कहा कि यह रेल विभाग का गोपनीय विषय है, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। उन्होंने नए सर्वे को लेकर कोई तकनीकी जानकारी साझा नहीं की, लेकिन उम्मीद जताई कि दूसरा सर्वे पूर्ण होने के बाद सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। उज्जैन-झालावाड़ नई रेलवे लाइन एक लंबे समय से लंबित परियोजना है। इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र को राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र से रेल मार्ग द्वारा जोड़ना है। यह परियोजना लगभग 190 किलोमीटर लंबी मानी जा रही है और वर्तमान में फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) तथा डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया में है। तीन रूटों का सर्वे रेलवे द्वारा इस परियोजना के लिए पहले तीन संभावित रूट पर सर्वे किया गया था। इनमें पिंक रूट (189.10 किमी, 38 कर्व, 64 पुल), ब्लू रूट (181.80 किमी, 37 कर्व, 45 पुल) और रेड रूट (177.86 किमी, 36 कर्व, 34 पुल) शामिल थे। पहले सर्वे के असफल होने के बाद अब प्रक्रिया को पुनः आगे बढ़ाया गया है। परियोजना पिछले 48 वर्षों से प्रस्तावित इस रेलवे लाइन के निर्माण से आगर-मालवा और नलखेड़ा (मां बगलामुखी मंदिर) जैसे धार्मिक एवं क्षेत्रीय केंद्रों को भी रेल सुविधा मिलने की संभावना है। इससे औद्योगिक विकास, व्यापार और यात्री आवागमन को गति मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना पिछले लगभग 48 वर्षों से प्रस्तावित बताई जाती रही है। अंतिम स्वीकृति, बजट आवंटन और समय-सीमा को लेकर रेल मंत्रालय स्तर पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। किसी भी रूट को अंतिम रूप मिलने के बाद ही भूमि अधिग्रहण और निर्माण प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।


