सरकारी महकमों में अब बिजली बिल अटकने की गुंजाइश कम हो जाएगी। जिन विभागों में समय पर बिल जमा नहीं करवाने की शिकायतें लंबे समय से चल रही थीं, उन्हें अब आरडीएसएस योजना के तहत स्मार्ट मीटरिंग से कड़ा नियंत्रण मिल गया है। उदयपुर जोन ने इस अभियान में 97.09 फीसदी लक्ष्य हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान बना लिया। अधिकारियों के मुताबिक राज्य सरकार ने निर्देश दिए थे कि जिन विभागों पर दो महीने से ज्यादा बकाया है और आरडीएसएस की अदायगी नहीं की गई है, उनके बिल जमा होने तक भुगतान सरकारी दफ्तरों की जिम्मेदारी मानी जाएगी। इसके बाद सभी विभागों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेज किया गया। उदयपुर जोन ने 97.09 फीसदी लक्ष्य पूरा कर तीनों जोन में पहला स्थान हासिल किया। उदयपुर आगे, अजमेर दूसरे स्थान पर 30 नवंबर तक अजमेर डिस्कॉम में स्मार्ट मीटर लगाने का काम 89.05 फीसदी पूरा हुआ। तीन जोन में उदयपुर सबसे आगे रहा, जहां 97.09 फीसदी विभागों में मीटर लग चुके हैं। डिस्कॉम डेटा के अनुसार, उदयपुर ज़ोन को 30 नवंबर तक 25,324 मीटर लगाने थे, जबकि जोन में 24,586 मीटर पहले ही लग चुके हैं। अजमेर डिस्कॉम क्षेत्र के अजमेर, उदयपुर और झुंझुनूं जोन में कुल 64,238 मीटर लगाने का लक्ष्य था। इसमें से 57,202 मीटर लग चुके हैं। – उदयपुर जोन का लक्ष्य: 20,035 मीटर, लगाए: 17,491 – झुंझुनूं जोन का लक्ष्य: 18,879 मीटर, लगाए: 15,125 – अजमेर जोन का लक्ष्य: 25,324 मीटर, लगाए: 24,586 स्मार्ट मीटर से क्या बदलेगा
अक्सर सरकारी विभागों में दो से तीन महीने तक बिल जमा नहीं होने से बकाया बढ़ता जाता था और बाद में विवाद भी खड़े हो जाते थे। समय पर भुगतान नहीं होने से डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ता था। स्मार्ट मीटरिंग से यह समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है। स्मार्ट मीटर से उपभोग का डेटा तुरंत उपलब्ध होगा, बिलिंग विवाद कम होंगे और पारदर्शिता आएगी। उपभोक्ता भी तय समय पर बिल जमा कर सकेंगे, जिससे डिस्कॉम की रिकवरी सुधरेगी और लाइन लॉस घटेगा। क्या है आरडीएसएस


