उदयपुर सीएमएचओ डॉ. शंकर बामणिया और आरसीएचओ डॉ. अशोक आदित्य के बीच एक बार फिर विवाद गहरा गया है। डॉ. शंकर बामणिया का कहना है कि उन्होंने अनियमित भुगतान और गबन के मामले में डॉ. अशोक आदित्य को एक नोटिस भेजा है। जबकि, डॉ. अशोक आदित्य बोले- मुझे अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला। सीएमएचओ उन्हें बदनाम करने के लिए साजिश रच रहे हैं। दरअसल, सीएमएचओ ने बीती शाम खबरनुमा अंदाज में एक टैक्स्ट मैसेज कुछ वॉट्सऐप ग्रुप में भेजा था, जिसमें डॉ. आदित्य का फोटो भी लगा था। सीएमएचओ डॉ. बामणिया से जब इस नोटिस की ऑफिशियल कॉपी मांगी गई तो वे कॉपी उपलब्ध नहीं करा पाए। वे बोले-नोटिस शुक्रवार को निकाला था और डॉ. आदित्य को भिजवा दिया है। इधर, डॉ आदित्य से जब नोटिस के संबंध में पूछा गया तो वे बोले- उन्हें अभी तक ऐसा कोई नोटिस नहीं मिला है। मैं सीएमएचओ के खिलाफ लीगल एक्शन लूंगा। डॉ. आदित्य ने बताया कि उन्होंने चिकित्सा विभाग के डायरेक्टर रवि माथुर को मामले से अवगत कराया है। उन्होंने डायरेक्टर को बताया कि उन्हें मीडिया के मार्फत ये पता लगा कि उन्हें सीएमएचओ से नोटिस दिया गया, जबकि हकीकत में उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला। उन्हें बदनाम किया जा रहा है। टैक्स्ट मैसेज में सीएमएचओ ने ये भेजा लेटर सीएमएचओ डॉ. बामणिया ने टैक्स्ट मैसेज में लिखा कि अप्रैल 2020 से मार्च 2023 में अनियमित भुगतान और वसूली के संबंध में 13.19 लाख रुपए गबन की राशि वसूली के संबंध में डॉ अशोक आदित्य को फिर नोटिस जारी किया है। जिसमें उन्हें गबन की राशि राजकोष में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। अगर 15 दिन में राशि जमा नहीं कराई तो जिला कोष अधिकारी को लिखकर वेतन से कटौती कराई जाएगी। 6 लोगों को मिल चुका है नोटिस कोर्ट स्टे लाने के बाद गत वर्ष अप्रैल माह के पहले सप्ताह में डॉ. आदित्य समेत 6 लोगों के खिलाफ गबन मामले में नोटिस निकाला गया था। इनमें पूर्व सीएमएचओ दिनेश खराड़ी, सहायक प्रशासनिक अधिकारी आशीष डामोर, डॉक्टर अंजना मीणा, फार्मासिस्ट दीपिका राणावत व फार्मासिस्ट प्रेरणा पुजारी भी शामिल थे। ये मामला अप्रैल 2020 से मार्च 2023 के बीच हुई ऑडिट का था। इनमें अनियमित भुगतान एवं गबन के आरोप लगे थे। उस समय भी सभी से अलग—अलग राशि जमा कराने को कहा गया था। पद को लेकर शुरू हुआ था दोनों में आपसी विवाद सीएमएचओ डॉ. बामणिया और डॉ. अशोक आदित्य के बीच गत वर्ष मार्च में पद को लेकर विवाद शुरू हुआ था। जब राज्य सरकार ने डॉ. बामणिया को हटाकर डॉ आदित्य को सीएमएचओ बना दिया था। इस आदेश के खिलाफ एक सप्ताह में डॉ. बामणिया कोर्ट से स्टे ले आए और पद पर बने रहे। 5 माह तक दो एक ही पद पर जमे रहे। डॉ. आदित्य राज्य सरकार के आदेश से तो डॉ बामणिया कोर्ट के आदेश से सीएमएचओ पद पर आसीन थे लेकिन दोनों के बीच प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को लेकर जंग चल रही थी। बाद में सरकार ने बामणिया को ये अधिकार दे दिए।


