उमंग सिंघार बोले-आदिवासियों के लिए अलग कोड जरूरी:सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष बोले-आदिवासी कोड नहीं मिला तो पहचान खतरे में, पूरे देश का आंदोलन बनाएं

बुरहानपुर जिले के नेपानगर क्षेत्र के ग्राम चैनपुरा में आयोजित 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन में मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों के लिए अलग कोड की वकालत की। बुधवार को सम्मेलन के दूसरे दिन उन्होंने मंच से यह मांग उठाई। सिंघार ने कहा- देश में आदिवासियों का अपना अलग कोड होना चाहिए, क्योंकि उनकी अपनी विशिष्ट रीति-रिवाज, संस्कृति और समाज है। आदिवासी जंगल, सूर्य, गाय, बैल और फसलों की पूजा करते हैं, जो उनकी पहचान का अभिन्न अंग है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आदिवासी कोड न मिलना उनकी पहचान को खत्म करने की साजिश हो सकती है। सिंघार ने आदिवासी समाज से इस लड़ाई को योजनाबद्ध तरीके से लड़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह समाज के हाथ में है कि वे इसे पूरे देश का आंदोलन बनाएं। जातिगत जनगणना का किया समर्थन नेता प्रतिपक्ष ने जातिगत जनगणना का भी समर्थन किया और झारखंड के आदिवासियों के संघर्ष का उदाहरण दिया। उमंग सिंघार ने कहा- मध्य प्रदेश में डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी हैं और उनकी ओर से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा जाना चाहिए, जिसमें आदिवासी कोड के अधिकार की मांग की जाए। मीडिया से चर्चा के दौरान सिंघार ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि संविधान में सभी को धर्म कोड मिला है। उन्होंने दावा किया कि आजादी से पहले आदिवासियों के लिए कोड था, लेकिन अब इसकी अनुपस्थिति से आदिवासी समाज की पहचान खत्म हो रही है। उन्होंने जोर दिया कि रीति-रिवाज, संस्कृति और सामाजिक धरोहरें हजारों सालों से उनकी पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता है। बोले-आदिवासी हितों की बात आती है तो जवाबदारी से समाज की बात रखता हूं
उमंग सिंघार ने कहा समाज के सदस्य के नाते यहां आया हूं। जब भी समाज के लोग मिलते हैं उनसे कहता हूं कि समाज की बात होती है तो मैं उनसे कहता हूं कि सदस्य होने के नाते आपके साथ खड़ा हूं। मैं मानता हूं कि राजनीतिक पार्टी से हूं, लेकिन जब आदिवासी हितों की बात आती है तो जवाबदारी से समाज की बात रखता हूं, लेकिन इस लोकतंत्र की व्यवस्था में हम अपने अधिकार नहीं पा पाते। कोई भी पार्टी होती है सबकी अपनी अपनी विचारधार होती है, लेकिन जब के हित की बात आती है तो उस समय कईं लोग भाग जाते हैं। क्यों भागते हो इस समाज से आपकी पहचान है। कहा, सांसद, विधायकों की डोर समाज के हाथ होना चाहिए सिंघर ने कहा कोई विधायक बने, सांसद बने, लेकिन उस जनप्रतिनिधि की डोर इस समाज के लोगों के हाथ में होना चाहिए, लेकिन वह समाज को भूल भी जाते है। मुझे दर्द है उन गरीबों का जो सालों से पट्टों की लड़ाई लड़ रहे हैं जंगल में संघर्ष कर रहे है। समाज के लोगों को एक जाजम पर बैठकर आदिवासी पट्टे की बात करना चाहिए। सिंगरोली में अडानी को खदानें दे दी। वहां के आदिवासी परेशान हैं। खदान किसी उद्योगपति को जाती है, कंपनी को जाती है उस पहले उस जमीन पर आदिवासी का हक है। कागजों पर बात होती है। आखिरी में सिंघार ने एक शेर कहा, इस सियासत की विरासत हम हैं। इस विरासत की सियासत भी हम करें।

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