1001 छिद्रों वाले शिवलिंग के दर्शन को उमड़ी भीड़:महामृत्युंजय मंदिर और क्योंटी मेले में 50 हजार से अधिक लोग शामिल हुए

रीवा जिले में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। किला परिसर स्थित महामृत्युंजय मंदिर, क्योंटी जलप्रपात सहित जिले के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर आज मेले लगाए गए। शाम 4 बजे तक जिले भर से 50 हजार से अधिक लोग मेले में शामिल हुए। सुबह से ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ने लगी, जिससे जिले भर में उत्सव का माहौल बन गया। किला परिसर के महामृत्युंजय मंदिर में भी परंपरा के अनुसार भव्य मेला आयोजित किया गया। 1001 छिद्रों वाले शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी। मान्यता है कि यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। अगले तीन दिन तक मंदिर परिसर में दान-पुण्य के साथ पारंपरिक खानपान और खरीदारी की दुकानों में भी रौनक है। जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल क्योंटी जलप्रपात में भी मकर संक्रांति के अवसर पर आज से मेला शुरू हुआ। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आए पर्यटक बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए गए। धार्मिक स्थलों पर मेला लगा देवतालाब, बसामन मामा, लक्ष्मण बाग, रानी तालाब, बहुती जलप्रपात और अष्टभुजी माता मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी आज मेले और धार्मिक आयोजन हुए। श्रद्धालु स्नान-दान और पूजा-पाठ कर पुण्य लाभ अर्जित करने पहुंचे। मकर संक्रांति को लेकर घरों और बाजारों में भी खास चहल-पहल नजर आई। तिल-गुड़ के लड्डू, लाई, खिचड़ी, गन्ना और मौसमी मिठाइयों से बाजार सजे हुए नजर आए। विंध्य क्षेत्र में मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के रूप में मनाने की परंपरा है। इस अवसर पर सूर्य देव को खिचड़ी अर्पित कर पुरोहित ब्राह्मणों को दान दिया जाता है, जिसे अन्नदान और परोपकार का प्रतीक माना जाता है। भीड़ संभावित सभी स्थलों पर प्रशासन की पैनी नजर बनी रही। पुलिस और प्रशासनिक अमला भी तैनात रहा ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। रीवा जिले में आज मकर संक्रांति का पर्व आस्था, परंपरा और उल्लास के साथ मनाया गया।

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