ऊर्जा मंत्री बोले:1 करोड़ लोग सिर्फ 100 रुपए बिल दे रहे, इसलिए मप्र में बिजली सबसे महंगी है

मध्य प्रदेश की तीनों बिजली कंपनियां, जो सालों से घाटे में चल रही हैं, 2028 तक घाटे से उबर जाएंगी। इस दौरान सरकार यह प्रयास करेगी कि बिजली उपभोक्ताओं पर भार न बढ़े, यानी बिजली टैरिफ में कोई वृद्धि न हो। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह‎ तोमर ने रविवार को यह भरोसा दिलाया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस समय मध्य प्रदेश में बिजली की उपलब्धता अच्छी है। किसानों को भी अधिक बिजली दी जा रही है। उनसे जब पूछा गया कि जब पर्याप्त बिजली है तो फिर उसे सस्ती किया जाए, तो तोमर ने कहा, “प्रदेश में 1 करोड़ 35 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, उसमें से करीब एक करोड़ तो सिर्फ 100 रुपए में बिजली वाली सब्सिडी स्कीम से जुड़े हैं। ऐसे में सस्ती बिजली कैसे देंगे?” 3 साल में 51 हजार भर्तियां तीनों बिजली कंपनियों में होंगी यह जरूर है कि स्मार्ट मीटर आने वाले समय में काफी अच्छा काम करेंगे। एक्चुअल रीडिंग आएगी। उपभोक्ता चाहे तो बिजली का बिल मैनेज भी कर सकेगा। तोमर रविवार को मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों पर निर्भरता कम करने के लिए राज्य सरकार तीनों बिजली कंपनियों में 51 हजार 711 नियमित पदों पर भर्ती करेगी। यह भर्तियां अगले तीन साल में की जाएंगी। इसके साथ ही बिजली चोरी रोकने के लिए ऊर्जा विभाग विद्युत थाने शुरू करने जा रहा है, इसका प्रस्ताव भी तैयार है, जल्द ही इस पर सरकार के स्तर पर फैसला लिया जाएगा। ऊर्जा मंत्री तोमर ने दो साल की उपलब्धियां और आगामी तीन साल की कार्ययोजना पर भी बात की। 6000 मेगावाट सरप्लस है बिजली तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश में वर्तमान में विद्युत उत्पादन की कुल अनुबंधित क्षमता 25 हजार 81 मेगावाट है। इस साल अभी तक की सर्वाधिक घरेलू विद्युत डिमांड 19 हजार 113 मेगावाट है। इस लिहाज से मध्य प्रदेश लगभग 6 हजार मेगावाट सरप्लस बिजली स्टेट है। मध्य प्रदेश में विद्युत डिमांड भी लगातार बढ़ रही है, जो प्रदेश में तरक्की का संकेतक है। इसको ध्यान में रखकर 660-660 मेगावाट के दो थर्मल पॉवर प्लांट सारणी और चचाई में अगले पांच साल में स्थापित किए जाएंगे। चोरी की सूचना पर दे रहे इनाम तोमर ने बताया कि बिजली चोरी और बिजली के दुरुपयोग को रोकने के लिए ऊर्जा विभाग ने वी-मित्र एप विकसित किया है। पिछले 4 महीनों में इस एप से मिली जानकारी के आधार पर 48 हजार केस दर्ज किए गए हैं। 8650 मामलों में अनियमितता की पुष्टि हुई है। इन केसों में बिजली कंपनियों ने 7.5 करोड़ रुपए की रिकवरी बिजली चोरी करने वालों पर निकाली है। सूचना देने वाले लोगों को 26 लाख रुपए इनाम दिया गया है।

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