भास्कर न्यूज | कवर्धा जंगलों में बिछे अदृश्य मौत के फंदे अब ज्यादा दिन तक वन्यप्राणियों की जान नहीं लेंगे। कबीरधाम वनमंडल समेत दुर्ग वृत्त के सभी वन क्षेत्रों में अवैध शिकार के खिलाफ पहली बार “एंटी स्नेयर वॉक” (फांदा मुक्त जंगल अभियान) को औपचारिक रूप से लागू किया गया है। इसका सीधा मकसद है- जंगल में लगाए गए फंदों की पहचान कर उन्हें मौके पर निष्क्रिय करना और शिकारियों की प्लानिंग ध्वस्त करना। यही नहीं, कबीरधाम वनमंडल के 165 बीटों पर शिकारी वॉच टावर बनेगी। इसमें भोरमदेव अभयारण्य के 33 बीट भी शामिल हैं। भोरमदेव सेंचुरी की अधीक्षक अनिता साहू ने बताया कि हर बीट गार्ड को अब शिकारी पकड़ने की फ्रंटलाइन में तब्दील करेंगे। खास बात ये है कि वन विभाग, पुलिस, बिजली कंपनी, साइबर सेल और नोवा नेचर सब मिलकर एक साझा ऑपरेशन चलाएंगे। इस ऑपरेशन को फांदा मुक्त जंगल का नाम दिया है। यानी अब शिकारी सिर्फ जंगल में नहीं, डिजिटल ट्रैक पर भी पकड़े जाएंगे। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शिकारियों तक पहुंचने का बड़ा हथियार बनेंगे। वन काष्ठागार कवर्धा में शुक्रवार को हुई वृत्त स्तरीय कार्यशाला में दुर्ग वृत्त के सभी वनमंडलों के अधिकारियों को ट्रेनिंग दी गई। कार्यशाला में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) माथेश्वरन वी ने स्पष्ट कहा कि अब किसी भी अप्रिय घटना का इंतजार नहीं करेंगे। हर वन बीट सशक्त होगा। अधिकारी मुख्यालय में रहेंगे। संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त होगी और इंटेलिजेंस तंत्र को मजबूत करेंगे। आप भी जानिए, क्यों अहम है एंटी स्नेयर वॉक? एंटी स्नेयर वॉक से अमले को स्पष्ट टास्क मिलेगा। कहां जाना है, क्या देखना है और कैसे कार्रवाई करनी है? इससे बिना संसाधनों के भी स्मार्ट पेट्रोलिंग संभव हो सकेगी। गौरतलब है कि पूर्व में वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में ही एंटी स्नेयर वॉक लागू था। लेकिन हाल ही में खैरागढ़ में हुए तेंदुए के शिकार और कवर्धा वनमंडल में दो इंडियन बायसन (गौर) और एक तेंदुए की मौत के बाद इसे पूरे दुर्ग वृत्त के सभी वनक्षेत्रों में शुरू की जा रही है। कार्यशाला में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि वन क्षेत्रों से गुजरने वाली बिजली लाइनों में अवैध हुकिंग वन्यप्राणियों की मौत का बड़ा कारण बन रही है। डीएफओ निखिल अग्रवाल ने बताया कि इसे रोकने के लिए वन और बिजली कंपनी की संयुक्त रणनीति तय करने पर सहमति बनी। इसे लेकर गंभीरता के साथ काम करने कहा गया।


