रिम्स के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने एमबीबीएस छात्रों पर 5 वर्षों की बॉन्ड सेवा लागू करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। जेडीए ने इसे न केवल अनुचित बल्कि मेडिकल छात्रों के लिए हतोत्साहित करने वाला कदम बताया है। एसोसिएशन ने कहा कि मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलताओं का बोझ मेडिकल छात्रों पर डालना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। जेडीए ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पहले से ही पीजी कर रहे चिकित्सकों को तीन वर्ष की बॉन्ड सेवा देनी पड़ रही है, ऐसे में एमबीबीएस छात्रों पर पांच साल की बॉन्ड सेवा थोपना जबरन श्रम के समान है। इससे छात्र आगे की पढ़ाई, विशेषज्ञता और सुपर स्पेशियलिटी की तैयारी नहीं कर पाएंगे, जिसका सीधा असर झारखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा। एसोसिएशन ने यह भी सवाल उठाया कि जब अन्य राज्यों में बॉन्ड अवधि कम की जा रही है, तब झारखंड में इसे बढ़ाने की कोशिश क्यों की जा रही है। जेडीए का कहना है कि नीति को लागू करने से पहले मेडिकल छात्रों से विमर्श नहीं किया गया।


