भास्कर न्यूज | चिरमिरी कभी 85 हजार से अधिक की आबादी वाला और प्रदेश के प्रमुख राजस्व केंद्रों में गिना जाने वाला नगर निगम चिरमिरी आज गंभीर जनसांख्यिकीय संकट से जूझ रहा है। शासन की हालिया एसआईआर प्रक्रिया के बाद नगर निगम क्षेत्र की मतदाता सूची से एक साथ 8,578 नाम हटा दिए गए हैं। यह गिरावट न केवल शहर के गिरते जनसंख्या ग्राफ को दर्शाती है, बल्कि आने वाले निकाय चुनावों के राजनीतिक समीकरणों को भी पूरी तरह बदल सकती है। विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद चिरमिरी में मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। पहले यहां ए, बी और सी श्रेणी के कुल 53,600 मतदाता थे, जो अब घटकर मात्र 42,022 रह गए हैं। सूची से हटाए गए अधिकांश लोग वे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो लंबे समय से रोजगार की तलाश में शहर छोड़कर दूसरे स्थानों पर स्थायी रूप से बस गए हैं। कुल कटे हुए नामों में से 2,083 मतदाताओं को नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन तय समय में जवाब न मिलने पर उनके नाम अस्थायी रूप से काट दिए गए हैं। चिरमिरी की पहचान पिछले 9 दशकों से कोयला उत्खनन केंद्र के रूप में रही है। लेकिन हाल के वर्षों में एसईसीएल की कई खदानें बंद होने या उत्पादन घटने से रोजगार के अवसर समाप्त हुए। कोयले पर निर्भरता तो रही, लेकिन वैकल्पिक उद्योग या पर्यटन के क्षेत्र में ठोस काम नहीं हुआ। रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में युवा वर्ग दिल्ली, बिलासपुर और रायपुर जैसे शहरों की ओर पलायन कर गया।


