भास्कर न्यूज | लुधियाना आरटीए कार्यालय में बैकलॉग एंट्री की प्रक्रिया आम जनता के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। जिस काम को सरकार ने ऑनलाइन और आसान बनाने का दावा किया था, वही प्रक्रिया अब लोगों की जेब और समय दोनों पर भारी पड़ रही है। बैकलॉग एंट्री के नाम पर जनता से स्टांप पेपर, टाइपिंग, सेवा केंद्र शुल्क और फोटो फीस वसूली जा रही है, जिसके चलते रोजाना सैकड़ों लोग आरटीए दफ्तर और सेवा केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। बैकलॉग एंट्री करवाने के लिए पहले 50 रुपए का स्टांप पेपर लेना जरूरी किया गया है। इसके बाद उस पर टाइपिंग करवानी पड़ती है, फिर सेवा केंद्र जाकर आवेदन जमा करवाना होता है, जहां फोटो खिंचवाने के बाद फीस जमा करनी पड़ती है। इसके बाद फाइल आरटीए कार्यालय में जमा होती है और तब जाकर ड्राइविंग लाइसेंस की बैकलॉग एंट्री ऑनलाइन की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में एक दिन से ज्यादा समय लग रहा है। अनिल कुमार ने बताया कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस पहले से बना हुआ है, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में नहीं दिख रहा था। जब उन्होंने आरटीए विभाग से जानकारी ली तो उन्हें 50 रुपए का स्टांप पेपर लाने और उस पर टाइपिंग करवाने को कहा गया। इसके बाद सेवा केंद्र में जाकर फीस दी और फोटो भी खिंचवाई। सुबह से शाम तक इस प्रक्रिया में उनका पूरा दिन खराब हो गया। उन्होंने कहा कि विभाग की गलती का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। लोगों से पैसा वसूला जा रहा है: वहीं, नवजोत कौर ने बताया कि उन्हें भी अपने लाइसेंस की बैकलॉग एंट्री करवाने के लिए करीब 200 रुपए खर्च करने पड़े और पूरा दिन बर्बाद हो गया, लेकिन इसके बावजूद अभी तक उनकी एंट्री पूरी नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को जनता को राहत देनी चाहिए थी, लेकिन उल्टा आम लोगों से पैसा वसूला जा रहा है। सीएम से बात कर समाधान कराएंगे: इस मामले में जब परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पहले बैकलॉग एंट्री की सेवा मुफ्त थी, लेकिन लंबे समय तक लोगों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं करवाई। अब सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर स्टांप पेपर अनिवार्य कर दिया है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि वे मुख्यमंत्री से बात कर इस समस्या का जल्द समाधान निकालेंगे।


