निवाड़ी जिले की धार्मिक नगरी ओरछा में दशहरा पर्व इस वर्ष भी अपनी 430 साल पुरानी विशिष्ट परंपरा के साथ मनाया गया। यहां विराजमान श्रीरामराजा सरकार को लेकर यह अनोखी मान्यता है कि रावण से भीषण युद्ध के बाद भगवान ने इस दिन विश्राम किया था। इसी वजह से हर साल दशहरे और रामनवमी पर मंदिर के पट सामान्य समय से 4 घंटे देर यानी दोपहर 12 बजे खोले जाते हैं। आज दशहरे के मौके पर भी इस सदियों पुरानी परंपरा को निभाते हुए मंदिर के पट दोपहर 12 बजे खोले गए, जिसके बाद रामराजा सरकार की आरती की गई। पट खुलने से पहले ही सुबह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़ पड़े थे। मंत्री हों या अफसर, सबसे ऊपर श्रीरामराजा सरकार ओरछा के रामराजा सरकार के दरबार की एक और अनूठी पहचान है कि यहां मंत्री हो या अफसर सब बराबर माने जाते हैं। मंदिर की परंपरा में श्रीरामराजा सरकार ही सर्वोपरि हैं। विशेष शृंगार और पान-इत्र का बीड़ा दशहरे के दिन भगवान श्रीराम का विशेष शृंगार किया गया। दोपहर 12 बजे पट खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इसके बाद 2 बजे मंगल हुआ और रात 8 बजे फिर से पट खोले जाएंगे। दशहरे की विशेष परंपरा के तहत हर श्रद्धालु को पान और इत्र की काड़ी दी जाती है। श्रद्धालु भी इस अवसर पर पान का बीड़ा श्रीरामराजा सरकार को भेंट कर विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हैं। इस आयोजन के साथ ही मंदिर परिसर में रावण वध पर्व का आयोजन भी धूमधाम से किया गया, जो ओरछा की पहचान और आस्था का केंद्र है।


