लुधियाना। ओरिसन अस्पताल की मॉर्च्युरी से जुड़े घटनाक्रम में डॉक्टरों पर दर्ज एफआईआर के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) लुधियाना चैप्टर ने मोर्चा खोल दिया है। आईएमए के संरक्षक डॉ. मनोज कुमार सोबती, अध्यक्ष डॉ. पवन ढींगरा और डॉ. सुनील कट्याल के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन से मुलाकात कर मामले में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि शवगृह में हुई घटना एक प्रशासनिक चूक है, जिसे आपराधिक कृत्य की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। प्रतिनिधिमंडल ने तर्क दिया कि एफआईआर में नामजद डॉ. निर्मलजीत एस. मल्ही और डॉ. राजीव ग्रोवर केवल ट्रीटिंग डॉक्टर हैं, जबकि निदेशक डॉ. सुनील मित्तल और डॉ. मनीषा मित्तल की मॉर्च्युरी के प्रत्यक्ष संचालन या निगरानी में कोई भूमिका नहीं होती। आईएमए के अनुसार, यह सेवाएं सहायक स्टाफ द्वारा संभाली जाती हैं, फिर भी डॉक्टरों को गलत तरीके से नामजद किया गया। डिप्टी कमिश्नर ने इस मामले में डॉक्टरों की बात सुनी और भरोसा जताया कि प्रस्तावित री-इंक्वायरी के माध्यम से निष्पक्ष जांच होगी और जवाबदेही सही प्रशासनिक स्तर पर तय की जाएगी।


