कटगी| कटगी सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ का पारंपरिक लोकपर्व छेर छेरा बड़े ही उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक सभी वर्गों के लोगों ने इस पर्व में भाग लेकर अपनी खुशियां साझा कीं। सुबह लगभग 7 बजे से ही गांवों की गलियों में छेरछेरा मांगने वाली टोलियां निकल पड़ीं, जो शाम 4 बजे तक सक्रिय रहीं। कटगी क्षेत्र के अमोदी, नवापारा, धमलपुर, डेराडीह, रामपुर, कोट, टिपरुंग, मानाकोनी, दर्रा, गिरौदपुरी, मंडवा सहित अन्य गांवों में “छेरछेरा माई, कोठी के धान हेरहेरा” की गूंज सुनाई देती रही। ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकलकर बच्चों को छेरछेरा देते नजर आए और उनके साथ पर्व की खुशियों में शामिल हुए। छेर छेरा पर्व का विशेष महत्व है, क्योंकि यह फसल कटाई के बाद मनाया जाता है। लोग नई फसल की खुशी में अन्न दान कर एक-दूसरे को अपनी खुशियों में सहभागी बनाते हैं। लोगों ने अपने घर को सजाया था।


